Teen Safety पर Meta घिरी, संसद तक पहुंचा मामला

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February 6, 2026

Meta teen accounts private: Social Media दिग्गज Meta एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मुद्दा है किशोर यूज़र्स की सुरक्षा। अमेरिका के कई सीनेटरों ने कंपनी से पूछा है कि जब Teen accounts को सुरक्षित बनाने का विकल्प पहले से मौजूद था, तो इसे लागू करने में वर्षों की देरी क्यों हुई। क्या सोशल मीडिया कंपनियां यूज़र सुरक्षा से ज्यादा प्लेटफॉर्म पर बिताए जाने वाले समय को प्राथमिकता देती हैं। Meta पर लगे ताज़ा आरोपों ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

क्या Meta ने किशोरों की सुरक्षा से ज्यादा एंगेजमेंट को प्राथमिकता दी? अमेरिकी सीनेटरों ने कंपनी से मांगा जवाब, जानिए पूरा मामला।

सीनेटरों ने सीधे CEO से मांगा जवाब

कई अमेरिकी सीनेटरों ने Meta के CEO Mark Zuckerberg को पत्र लिखकर विस्तार से जानकारी मांगी है। उनका कहना है कि किशोरों की सुरक्षा से जुड़े अहम फीचर्स लागू करने में देरी के कारणों को स्पष्ट किया जाना चाहिए। इसके अलावे उन्होंने यह भी कहा कि इस निर्णय प्रक्रिया में किन-किन टीमों की भूमिका रही है उसकी भी जानकारी दी जाए।

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पुराने दस्तावेज़ों ने बढ़ाई मुश्किलें

हाल ही में सार्वजनिक हुए अदालत के दस्तावेज़ों से संकेत मिला है कि कंपनी ने वर्षों पहले ही किशोर अकाउंट को प्राइवेट करने के विकल्प पर विचार किया था। लेकिन उस समय यह आशंका जताई गई कि इससे प्लेटफॉर्म की एंगेजमेंट प्रभावित हो सकती है, जिसके बाद योजना आगे नहीं बढ़ाई गई। अब यही लापरवाही जुकर्रबर्ग के लिए गले की फांस बनी हुई है।

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2024 में लागू हुआ बड़ा बदलाव

Meta ने सितंबर 2024 से Instagram पर किशोरों के अकाउंट को स्वतः प्राइवेट करने की प्रक्रिया शुरू की। बाद में इसी तरह के सुरक्षा उपाय Facebook और Messenger तक भी बढ़ाए गए। हालांकि आलोचकों का कहना है कि यह कदम बहुत देर से उठाया गया।

रिसर्च और पारदर्शिता पर भी सवाल

सीनेटरों ने यह भी जानना चाहा है कि क्या कभी ऐसी रिसर्च या अध्ययन को रोका गया, जिनसे प्लेटफॉर्म के नकारात्मक प्रभाव सामने आते हों। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ है, तो यह पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है। बाल यौन शोषण सामग्री और सेक्स ट्रैफिकिंग से जुड़े कंटेंट को हटाने की नीतियों को लेकर भी Meta से जवाब मांगा गया है।

मामलों में सख्ती और तेजी जरूरी

कानून-निर्माताओं का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्ती और तेजी बेहद जरूरी है। बताया जा रहा है कि सीनेटरों ने Meta को अपने सवालों के जवाब देने के लिए 6 मार्च तक का समय दिया है। अब सबकी नजर कंपनी की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

Rahul Ray

मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव। हिन्द पोस्ट हिन्दी मैगज़ीन, ईटीवी भारत और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य करते हुए प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाई है। दिल्ली और बिहार के विभिन्न जिलों में न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड स्टोरीज़, कंटेंट प्लानिंग, कॉपी एडिटिंग एवं कंटेंट एडिटिंग से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभालने का अनुभव है। मैंने भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार से डिग्री प्राप्त की है। पाठक केंद्रित कंटेंट तैयार करना मेरी कार्यशैली में शामिल रही है।

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