Google Battery: Google ने हाल ही में मिनेसोटा में अपने नए Data Center की घोषणा की है। जो पूरी तरह से रिन्यूएबल एनर्जी, पवन और सौर ऊर्जा पर आधारित होगा। प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत है Form Energy की 100 घंटे तक बिजली देने वाली विशाल बैटरी, जिस पर कंपनी ने 1 अरब डॉलर का निवेश किया है। जिसे ग्रीन एनर्जी की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। तो आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी विस्तार से।
Google और Form Energy मिलकर बनाने जा रहा ग्रीन डेटा सेंटर, 100 घंटे चलनेवाली बैटरी के लिए निवेश करेंगे 1 अरब डॉलर। जानिए इसके पीछे की रणनीति।
आयरन एयर तकनीक बैटरी का अनोखा तरीका
Form Energy की बैटरी पारंपरिक बैटरियों से बिल्कुल अलग है। इसमें ऑक्सीजन पंप की जाती है। जो लोहे को जंग लगाती है और इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉन्स निकलते हैं। इस तरह बैटरी लगातार 300 मेगावाट बिजली 100 घंटे तक सप्लाई कर सकती है। यह पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा से आने वाली बिजली के प्रवाह को संतुलित करने में मदद करेगी। जिससे डेटा सेंटर को बिना किसी रुकावट के चलाया जा सकेगा।
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वर्षों की मेहनत और उत्पादन की तैयारी
Form Energy इस तकनीक पर कई वर्षों से काम कर रहा है। कंपनी ने वेस्ट वर्जीनिया में अपने उत्पादन प्लांट की भी स्थापना कर दी है। नई बैटरी की आपूर्ति बड़े पैमाने पर की जा सके। हालांकि, Google के साथ यह समझौता कंपनी के लिए पहला बड़ा ऑर्डर साबित हुआ है। जिसने इसे वैश्विक ऊर्जा बाजार में पहचान दिलाई है।
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निवेश और IPO की तैयारी
Google के ऑर्डर के बाद, Form Energy सीईओ Mateo Jaramillo ने कहा कि उनकी कंपनी 500 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग राउंड जुटाने की प्रक्रिया में है। अब तक कंपनी ने कुल 1.4 अरब डॉलर की फंडिंग हासिल कर ली है। कंपनी की योजना अगले साल शेयर बाजार में अपनी पहचान दर्ज कराने की है। जिससे यह ऊर्जा और तकनीक की दुनिया में और बड़ा प्रभाव डाल सके।
ऊर्जा का भविष्य: ग्रीन एनर्जी और स्थिरता
बड़े टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म अब केवल क्लाउड या डेटा सेंटर तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे स्थायी ऊर्जा समाधानों में भी निवेश कर रहे हैं। ताकि ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक नई मिसाल भी कायम कर सके।
