Anthropic CEO criticism: अमेरिका द्वारा चीन को कुछ AI Chips के निर्यात की अनुमति देना महज़ एक व्यापारिक फैसला नहीं है, बल्कि यह टेक्नोलॉजी और भू-राजनीति के टकराव का नया अध्याय खोलता हुआ दिख रहा है। Nvidia के H200 और AMD की कुछ चिप्स को हरी झंडी मिलते ही यह सवाल उठने लगा है कि क्या वॉशिंगटन ने रणनीतिक बढ़त को खुद ही कमजोर कर दिया है।
Nvidia-Anthropic टकराव? AI चिप्स को लेकर दावोस से उठा बड़ा भू-राजनीतिक संकेत।
टेक इंडस्ट्री के अंदर से उठी तीखी आवाज़
दरअसल, इस फैसले के खिलाफ सबसे तेज़ प्रतिक्रिया किसी राजनेता की नहीं, AI इंडस्ट्री के एक बड़े चेहरे की ओर से आई। दावोस में Anthropic के CEO Dario Amodei ने खुले मंच से चेताया कि AI हार्डवेयर पर ढील भविष्य में अमेरिका के लिए गंभीर जोखिम बन सकती है। उनके मुताबिक, चिप्स सिर्फ सिलिकॉन नहीं, बल्कि शक्ति का स्रोत हैं।
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AI अगली पीढ़ी की बड़ी शक्ति बनेगा
अमोडेई का तर्क सीधा है जो देश AI को नियंत्रित करेगा। वही भविष्य की दिशा तय करेगा। उन्होंने AI को ऐसी सामूहिक बुद्धिमत्ता बताया, जो करोड़ों असाधारण दिमागों के बराबर होगी। इस नजरिए से देखें तो चिप्स का निर्यात हथियारों की बिक्री से कम खतरनाक नहीं माना जा सकता।
जब आलोचना अपने ही साझेदार पर आ जाए
इस पूरे विवाद एक विरोधाभास दिखाई दी है। जिस Nvidia पर अमोडेई ने परोक्ष रूप से सवाल उठाए, वही कंपनी Anthropic की सबसे अहम तकनीकी रीढ़ है। हाल ही में उसने अरबों डॉलर का निवेश भी किया है। यह दिखाता है कि AI की दौड़ में विचारधारा और कारोबारी रिश्ते टकरा रहे हैं।
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डर और दबाव के जरिए संदेश
हो सकता है कि यह बयान जानबूझकर तीखे शब्दों में दिया गया हो, ताकि अमेरिकी नीति-निर्माताओं का ध्यान खींचा जा सके। चीन की AI प्रगति को लेकर पश्चिमी कंपनियों में बेचैनी बढ़ रही है। अब यह डर सार्वजनिक मंचों पर भी साफ झलकने लगा है।
AI बना प्रभुत्व और सत्ता संतुलन
इस पूरे प्रकरण से एक बात स्पष्ट होती है। AI अब तकनीक ही नहीं राष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक प्रभुत्व और सत्ता संतुलन का मुद्दा बन चुका है। ऐसे में जब इंडस्ट्री लीडर्स बिना हिचक इतने कड़े बयान देने लगें, तो यह आने वाले समय में और बड़े टकरावों को आमंत्रित कर सकता है।
