Google को NCLAT से झटका, इस मामले में देने होंगे इतने करोड़

5 mins read
722 views
Google fined
April 21, 2025

भारत में NCLAT ने प्ले स्टोर की नीतियों के संबंध में अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग करने के लिए Google पर 936.44 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

NCLAT Order On Google: Google को अपनी प्ले स्टोर पॉलिसी को लेकर बड़ा झटका लगा है। NCLAT ने Google द्वारा जमा किए गए उस डॉक्यूमेंट से गोपनीय राजस्व से जुड़ी इन्फॉर्मेशन हटाने का आदेश दिया है, जो कंपनी ने 6 अक्टूबर 2022 को ट्रिब्यूनल को सौंपा था। यह फैसला Google की पॉलिसी के खिलाफ चल रही सुनवाई के दौरान लिया गया। ट्रिब्यूनल का कहना है कि सार्वजनिक दस्तावेजों में कंपनी की संवेदनशील कमाई से जुड़ी जानकारी नहीं होनी चाहिए।

इससे पहले 28 मार्च को NCLAT ने CCI के फैसले को सही बताया था, जिसमें Google की प्ले स्टोर बिलिंग पॉलिसी को डेवलपर्स के लिए अनुचित बताया गया था। हालांकि, Google पर लगाए गए जुर्माने को घटाकर 936.44 करोड़ रुपये से 216.69 करोड़ रुपये कर दिया गया था। इस मामले ने एक बार फिर ऐप डेवलपर्स और Google के बीच के विवाद को उजागर कर दिया है, जहां छोटे डेवलपर्स अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं और बड़ी टेक कंपनियों की नीतियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

गोपनीय जानकारी हटाने का आदेश लेकिन जुर्माना भरना होगा

Google और उसकी पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक ने ट्रिब्यूनल से अपील की थी कि फैसले के कुछ हिस्से से गोपनीय जानकारी को हटाया जाए। कंपनी का कहना था कि यह जानकारी एक ऐसे दस्तावेज से ली गई है, जिसे खुद CCI ने भी गोपनीय माना था। Google की इस मांग को NCLAT ने सही ठहराया और आदेश दिया कि फैसले के पैराग्राफ 97 से 100 तक की जानकारी को हटाया जाए। NCLAT के चेयरपर्सन जस्टिस अशोक भूषण और सदस्य बरुण मित्रा की पीठ ने कहा कि इस अपील में उचित आधार है। अब फैसले की संशोधित यानी रेडैक्टेड कॉपी ही सार्वजनिक की जाएगी और वेबसाइट पर वही अपलोड की जाएगी।

जुर्माने से राहत नहीं, भरनी होगी पूरी रकम

हालांकि, Google को गोपनीय जानकारी हटवाने में राहत जरूर मिली है, लेकिन जुर्माने के मामले में कोई छूट नहीं दी गई है। ट्रिब्यूनल ने पहले ही 936.44 करोड़ रुपये के जुर्माने को घटाकर 216.69 करोड़ कर दिया था, और अब ये पूरी राशि गूगल को 30 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। गूगल इस जुर्माने का 10% हिस्सा पहले ही जमा कर चुका है।

Ragini Sinha

5 साल के अनुभव के साथ मैंने मीडिया जगत में कंटेट राइटर, सीनियर कंटेंट राइटर, मीडिया एनालिस्ट और प्रोग्राम प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया है। बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव को मैंने कवर किया है। अपने काम को लेकर मुझे पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। काम को जल्दी सीखने की कला मुझे औरों से अलग बनाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Snapchat video
Previous Story

Instagram-Facebook के बाद Snapchat से भी होंगे मालामाल

Youtube news
Next Story

Youtube की जासूसी से खुद को बचाने के लिए अभी करें ये Settings

Latest from Latest news

technology

भारत ग्लोबल साउथ देशों के लिए टेक्नोलॉजी साझा करने में आगे

India Open Source Platforms:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वैश्विक संसदीय मंच पर भारत की टेक्नोलॉजी साझा करने की पहल को रेखांकित किया। दिल्ली में 28वें कॉन्फ्रेंस ऑफ स्पीकर्स एंड प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स ऑफ कॉमनवेल्थ 2026 के उद्घाटन अवसर पर मोदी ने कहा कि भारत ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहा है, जिन्हें ग्लोबल साउथ के देश अपनाकर अपने सिस्टम में लागू कर सकते हैं।  भारत ग्लोबल साउथ देशों के लिए टेक्नोलॉजी साझा कर रहा है, प्रधानमंत्री मोदी ने CSPOC 2026 में ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटल नवाचारों को साझा करने की पहल की जानकारी दी। भारत की ओपन सोर्स पहल  मोदी ने कहा कि अब भारत की टेक्नोलॉजी विकास रणनीति केवल देश के भीतर सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य यह है कि भारत में बने नवाचार ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि हमारे नवाचार पूरे ग्लोबल साउथ और कॉमनवेल्थ देशों के लिए लाभकारी हों। इसके लिए हम ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहे हैं, ताकि अन्य देश भी भारत जैसे सिस्टम विकसित कर सकें।  पिछले कुछ सालों में भारत ने पहचान, पेमेंट और प्रशासन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर डिजिटल सिस्टम बनाए हैं। कई छोटे देशों के लिए यह व्यावहारिक साबित हो रहा है क्योंकि महंगे सॉफ़्टवेयर पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है।  ग्लोबल साउथ पर जोर  प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ग्लोबल साउथ के देशों को अपना मार्ग खुद तय करना जरूरी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार ग्लोबल साउथ की चिंताओं को उठाया है। G20 अध्यक्षता के दौरान भी ये मुद्दे मुख्य चर्चा में रहे। मोदी ने कहा कि वैश्विक विकास संतुलित तभी हो सकता है जब दुनिया के बड़े हिस्से पीछे न रहें।  READ MORE: Elon Musk ने मोदी सरकार को कोर्ट में दी चुनौती? जानें क्यों  लोकतंत्र और संसदीय शिक्षा  मोदी ने CSPOC सम्मेलन के व्यापक उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य विभिन्न देशों में संसदीय लोकतंत्र की जानकारी और समझ बढ़ाना है। मोदी ने भारत के लोकतंत्र की मजबूती और विविधता को इसकी ताकत बताया। उन्होंने इसे एक बड़े पेड़ की तरह बताया, जिसकी जड़ें गहरी हैं और शाखाएं बहस, संवाद और सामूहिक निर्णय लेने के लिए फैली हुई हैं।  READ MORE: X पर पीएम मोदी का दबदबा, भारत में सबसे ज्यादा पसंद किए गए पोस्ट  मोदी ने कहा कि भारत सिर्फ टेक्नोलॉजी प्रदाता नहीं है, बल्कि प्रशासन, कानून निर्माण और डिजिटल सिस्टम के अनुभव साझा करने वाला साझेदार बनना चाहता है। इस सम्मेलन में यह संदेश भी गया कि भविष्य में टेक्नोलॉजी और लोकतंत्र को एक साथ विकसित करना जरूरी है, खासकर उन देशों के लिए जो अभी अपनी आधारभूत प्रणाली बना रहे हैं। 

Don't Miss