अब जी नहीं सकता… Neuralink चिप वाले पहले इंसान का खुलास

अब जी नहीं सकता… Neuralink चिप वाले पहले इंसान का खुलास

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March 23, 2026

Neuralink Brain Chip: नोलैंड अरबॉ वो इंसान हैं जिनके दिमाग में सबसे पहले एलन मस्क की कंपनी Neuralink का N1 चिप लगाया गया था। हाल ही में उन्होंने इस डिवाइस के साथ अपने 100 दिन पूरे किए हैं, जिसके बाद उन्होंने X पर अपना पूरा अनुभव शेयर किया है।

क्या हो अगर आप बिना हाथ हिलाए सिर्फ सोच से कंप्यूटर चला सकें? Neuralink के N1 चिप ने यह मुमकिन कर दिखाया।

कौन हैं नोलैंड?

नोलैंड 2016 में एक डाइविंग एक्सीडेंट की वजह से कंधों के नीचे से पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गए थे। ऐसे में Neuralink का यह चिप उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं साबित हुआ।

ऑपरेशन कैसा रहा?

नोलैंड कहते हैं कि ऑपरेशन बेहद आसान था। उन्हें हल्का बेहोश किया गया था, एक छोटा सा चीरा लगाया गया और रोबोट ने बाकी काम किया। रोबोट ने उनके दिमाग के मोटर कॉर्टेक्स हिस्से में 1,024 का बेहद पतले धागे जैसे तार लगाया था फिर अगले दिन वो घर चले गए। तीन दिन में वह काफी बेहतर महसूस करने लगे, 7 दिन में तो चीरे का निशान भी लगभग गायब हो गया था। चिप ऑन होने के बाद वो पहले से ज्यादा तेज और खुश महसूस करने लगे।

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कमाल का अनुभव

दूसरे हफ्ते में उन्होंने अपने बिल्कुल नए Apple MacBook के साथ इस चिप को जोड़ा। यह उनकी जिंदगी की पहली Mac थी। Neuralink के इंजीनियरों ने थोड़ी कैलिब्रेशन करवाई और बस नोलैंड सिर्फ सोचकर कर्सर हिलाने लगे। शुरुआत में यह थोड़ा अजीब लगा, जैसे कोई सपना याद करने की कोशिश की जा रही हो, लेकिन तीसरे हफ्ते तक यह उनके लिए बिल्कुल नॉर्मल हो गया था। स्क्रोलिंग, क्लिकिंग, टाइपिंग सब कुछ सिर्फ दिमाग से हो रहा था। नोलैंड कहते हैं कि Mac के साथ इंटीग्रेशन इतना स्मूद था कि मैं बिना किसी अनुभव के पावर-यूजर बन गया।

गेमिंग भी बिना हाथों के पॉसिबल

80वें दिन नोलैंड ने World of Warcraft गेम खेली वो भी बिना माउस, बिना कीबोर्ड के। उन्हें पहली बार थोड़ी मुश्किल हुई, लेकिन जैसे ही दिमाग और चिप की ‘ट्यूनिंग’ बैठी, सब कुछ जादू जैसा लगने लगा। अब वह पूरी रेड्स और एडवेंचर खेलते हैं  बस इरादे से, कोई डिवाइस नहीं छूते। नोलैंड ने बताया कि हर अपडेट पर हजारों लोगों के मैसेज आए। सबने सवाल पूछे और उत्साह दिखाया। यह पॉजिटिविटी उनके लिए बड़ी प्रेरणा बनी।

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आखिर में नोलैंड ने क्या कहा?

नोलैंड ने कहा कि 100 दिन हो गए और अब मैं इसके बिना अपनी जिंदगी सोच भी नहीं सकता। N1 ने मुझे सिर्फ कंप्यूटर इस्तेमाल करने का नया तरीका नहीं दिया बल्कि जीने का नया तरीका दिया है। Neuralink का यह चिप अभी क्लिनिकल ट्रायल में है, लेकिन नोलैंड की कहानी यह साबित करती है कि ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक लकवाग्रस्त लोगों की जिंदगी बदल सकती है और शायद भविष्य में इंसान और मशीन के रिश्ते को भी नए सिरे से परिभाषित कर सकती है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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