Payments Without OTP: भारत में बैंक और टेलीकॉम कंपनियां धीरे-धीरे OTP सिस्टम से आगे बढ़ने की तैयारी कर रही हैं। आने वाले समय में यूजर्स को शायद पता भी नहीं चलेगा कि यह बदलाव कब लागू हो गया। इस नए सिस्टम को साइलेंट ऑथेंटिकेशन कहा जा रहा है, जो पेमेंट को मंजूरी देने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है।
भारत में OTP की जगह ले रहा है साइलेंट ऑथेंटिकेशन, जानिए कैसे यह नया सिस्टम पेमेंट को तेज और सुरक्षित बना रहा है।
साइलेंट ऑथेंटिकेशन क्या है?
इस नई तकनीक में यूजर को कोई OTP डालने की जरूरत नहीं होती। इसके बजाय सिस्टम आपके फोन के SIM को बैकग्राउंड में चेक करता है और उसे बैंक अकाउंट से जुड़े नंबर से मिलाता है। अगर कोई गड़बड़ी मिलती है तो पेमेंट तुरंत रोक दी जाती है। इसमें न कोई अलर्ट आता है और न ही कोई अतिरिक्त स्टेप करना पड़ता है। पूरा प्रोसेस अपने आप चलता है।
OTP की परेशानी से मिलेगा छुटकारा
अब तक OTP सिस्टम में कई समस्याएं देखने को मिलती रही हैं जैसे मैसेज का देर से आना या कभी कभी बिल्कुल न आना। इसके अलावा SIM स्वैप जैसे फ्रॉड भी सामने आते रहते हैं। साइलेंट ऑथेंटिकेशन इन सभी परेशानियों को कम करने की कोशिश करता है जिससे पेमेंट का अनुभव तेज और आसान हो सके।
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बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों की तैयारी
कुछ बैंक जैसे Axis Bank पहले से ही टेलीकॉम कंपनियों के साथ इस सिस्टम का परीक्षण कर रहे हैं। इसमें SMS की जगह नेटवर्क डेटा का उपयोग किया जाएगा। इससे पेमेंट प्रोसेस काफी तेज और स्मूद हो सकता है खासकर उन लोगों के लिए जो OTP का इंतजार करते हुए परेशान हो जाते हैं।
RBI के नए नियमों का असर
1 अप्रैल से RBI के नए दो स्तर की सुरक्षा से जुड़े नियम लागू हो चुके हैं। हर डिजिटल ट्रांजैक्शन में अतिरिक्त सुरक्षा जरूरी है। साइलेंट ऑथेंटिकेशन इस जरूरत को पूरा करता है क्योंकि यह नेटवर्क स्तर पर SIM और डिवाइस की जांच करता है जिससे सुरक्षा और मजबूत हो जाती है।
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फायदे और चुनौतियां दोनों मौजूद
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा है तेज और आसान पेमेंट अनुभव। साथ ही फ्रॉड को रोकने में भी मदद मिल सकती है क्योंकि रियल टाइम जांच होती है, लेकिन एक कमी यह है कि यूजर को प्रक्रिया दिखाई नहीं देती। अगर पेमेंट फेल हो जाए तो कारण समझना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा यह सिस्टम पूरी तरह टेलीकॉम नेटवर्क पर निर्भर करता है इसलिए नेटवर्क में समस्या आने पर दिक्कत हो सकती है।
