PoK Terrorist Killing: साल 2019 में हुए पुलवामा अटैक का मास्टमाइंड आतंकवादी अरजमंद गुलजार उर्फ बुरहान हमजा की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में किसी अज्ञात हमलावरों गोली मारकर हत्या कर दी है। आतंकी बुरहान हमजा अल- बद्र के ऑपरेशनल कमांडर था। यह जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने, युवाओं के कट्टरपंथीकरण और हथियारों की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क का प्रमुख चेहरा था। पिछले तीन वर्षों से इस तरह की घटनाओं से पाकिस्तान के पनाह में रहनेवाले आतंकी ढ़ांचे की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
PoK में अज्ञात हमलावरों द्वारा अल-बद्र आतंकी कमांडर की हत्या ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ढांचे की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। जानिए पूरी रिपोर्ट।
सात साल पहले गया था पुलवामा से पाकिस्तान
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, अरजमंद गुलजार पुलवामा के रत्नीपोरा का रहने वाला गुलजार करीब सात वर्ष पहले पाकिस्तान गया था। बाद में अल-बद्र में शामिल हो गया। धीरे-धीरे उसने सीमा पार से भर्ती, फंडिंग और हथियार सप्लाई का बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया। इन आतंकियों के लिए पाकिस्ता अधिकृत कश्मीर सुरक्षित ठिकाना बना हुआ था लेकिन जिस तरीके से लक्ष्य बनाकर लगातार अज्ञात हमलावरों द्वार हत्याएं हो रही है। उससे इनके आंतरिक सुरक्षा जड़ों को हिलाकर रख दिया है।
सोशल मीडिया कट्टरपंथ का बड़ा चेहरा था गुलजार
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक गुलजार दक्षिण कश्मीर में डिजिटल कट्टरपंथ फैलाने में सक्रिय था। वह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को आतंकवाद बनने के लिए मोटिवेट करता था। यह अधिकतर पुलवामा, शोपियां और अवंतीपोरा में सक्रिय रहता था। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने वर्ष 2022 में उसे आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित किया था। उसका नाम विस्फोटक बरामदगी, ग्रेनेड हमलों और आतंकियों की भर्ती से जुड़े कई मामलों में सामने आया था।
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रहस्यमयी हमलों से पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी
बता दें कि 2023 के बाद से पाकिस्तान और पोक में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के 50 से अधिक शीर्ष कमांडर को अज्ञात हमलावरों मौत का घाट उतार दिया है। आतंकवादियों के बीच आंतरिक गुटबाजी या फिर आतंकवाद का सफाई अभियान है। पाकिस्तान सरकार ने अब तक इसपर कोई स्पष्ट विचार नहीं रखे हैं।
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पहले भी निशाने पर आ चुके हैं बड़े आतंकी चेहरे
इसी साल अप्रैल में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी की खैबर पख्तूनख्वा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे पहले मार्च में लश्कर के संस्थापक आमिर हमजा पर हुआ था। सुरक्षा सूत्रों का मानना है कि अरजमंद गुलजार की मौत घाटी में आतंकवाद को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहे संगठनों के लिए बड़ा झटका है।
