दिल्ली में होगा विश्वभर के टेक दिग्गजों का महासंगम, PM मोदी करेंगे नेतृत्व

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December 30, 2025

AI Impact Summit 2026: भारत अगले साल Artificial Intelligence के भविष्य को लेकर दुनिया के सबसे बड़े विमर्श का मंच बनने जा रहा है। फरवरी 2026 में नई दिल्ली में होने वाला AI Impact Summit वैश्विक टेक्नोलॉजी जगत का ध्यान भारत की ओर खींचेगा। इस ऐतिहासिक सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। जहां एआई के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक प्रभावों पर गहन चर्चा होगी।

भारत बनेगा वैश्विक AI चर्चा का केंद्र, नई दिल्ली में AI Impact Summit 2026, बिल गेट्स और डेमिस हासाबिस होंगे शामिल।

15 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, 100+ ग्लोबल CEO एक साथ

इस अंतरराष्ट्रीय समिट में करीब 15 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, 100 से अधिक दुनिया की शीर्ष कंपनियों के सीईओ और कई प्रभावशाली टेक लीडर्स हिस्सा लेंगे। Ministry of Communications and Information Technology  MeitY के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर एआई नीति, नवाचार और सहयोग को दिशा देने वाला साबित होगा।

पीएम मोदी की अगुवाई में खास CEO राउंडटेबल

बता दें कि इस समिट का उद्घाटन 19 फरवरी को PM Narendra Modi करेंगे। इसी दिन वे वैश्विक कंपनियों के प्रमुखों के साथ एक विशेष बैठक भी करेंगे। जिसमें भारत में निवेश, टेक्नोलॉजी साझेदारी और AI तंत्र को मजबूत करने पर चर्चा होगी। वहीं, इसे पूर्व 18 फरवरी को एक औपचारिक डिनर आयोजित किया जाएगा, जिसकी मेज़बानी स्वयं प्रधानमंत्री करेंगे। इससे साफ है कि भारत अब एआई के जरिए तकनीक जगत में अपनेआप को स्थापित करने के लिए कमर कस चुका है।

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AI Impact Summit का क्या है उद्देश्य?

इसे भारत के लिए वैश्विक स्तर के निवेशकों को आकर्षित करने के बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। सरकार इस मंच के जरिए भारत को AI Innovation हब के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर काम करेगी. जिससे स्टार्टअप्स, रिसर्च और इंडस्ट्री को नई गति मिलेगी। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बदलते स्वरूप, उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और भविष्य की दिशा पर वैश्विक सहमति बनाना है। हेल्थ, एजुकेशन, मैन्युफैक्चरिंग, गवर्नेंस और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई की भूमिका पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।

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IndiaAI Mission और LLM पर होगी विशेष चर्चा

आपके जानकारी के लिए बता दूं कि सरकार की महत्वाकांक्षी India AI Mission भी इस समिट का अहम हिस्सा होगी। खास तौर पर Large Language Model यानी LLM  के विकास, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई को भारतीय भाषाओं के अनुकूल बनाने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की जाएगी। LLM ऐसे उन्नत एआई मॉडल हैं जो इंसानों की तरह भाषा को समझने और संवाद करने में सक्षम होते हैं। बता दें कि सरकार India AI Mission के तहत LLM  की प्रगति पर भी इस समिट में चर्चा करने की तैयारी कर रही है। LLM ऐसे AI मॉडल होते हैं, जो इंसानों की तरह भाषा को समझ सकते हैं और लिख सकते हैं।

बिल गेट्स और डेमिस हासाबिस की मौजूदगी से बढ़ा कद

इस कार्यक्रम में माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक Bill Gates और गूगल डीपमाइंड के CEO Demis Hassabis जैसे दिग्गजों की भागीदारी होगी। जो इस बात का संकेत देता है कि भारत अब एआई की वैश्विक दौड़ में अग्रणी भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है। इनकी मौजूदगी से समिट का वैश्विक महत्व और भी बढ़ गया है।

एआई के युग में भारत की निर्णायक भूमिका

AI Impact Summit 2026 केवल एक सम्मेलन के यह समिट भारत को एआई के भविष्य का निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार कर सकता है।

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भारत ग्लोबल साउथ देशों के लिए टेक्नोलॉजी साझा करने में आगे

India Open Source Platforms:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वैश्विक संसदीय मंच पर भारत की टेक्नोलॉजी साझा करने की पहल को रेखांकित किया। दिल्ली में 28वें कॉन्फ्रेंस ऑफ स्पीकर्स एंड प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स ऑफ कॉमनवेल्थ 2026 के उद्घाटन अवसर पर मोदी ने कहा कि भारत ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहा है, जिन्हें ग्लोबल साउथ के देश अपनाकर अपने सिस्टम में लागू कर सकते हैं।  भारत ग्लोबल साउथ देशों के लिए टेक्नोलॉजी साझा कर रहा है, प्रधानमंत्री मोदी ने CSPOC 2026 में ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म और डिजिटल नवाचारों को साझा करने की पहल की जानकारी दी। भारत की ओपन सोर्स पहल  मोदी ने कहा कि अब भारत की टेक्नोलॉजी विकास रणनीति केवल देश के भीतर सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य यह है कि भारत में बने नवाचार ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि हमारे नवाचार पूरे ग्लोबल साउथ और कॉमनवेल्थ देशों के लिए लाभकारी हों। इसके लिए हम ओपन सोर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहे हैं, ताकि अन्य देश भी भारत जैसे सिस्टम विकसित कर सकें।  पिछले कुछ सालों में भारत ने पहचान, पेमेंट और प्रशासन के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर डिजिटल सिस्टम बनाए हैं। कई छोटे देशों के लिए यह व्यावहारिक साबित हो रहा है क्योंकि महंगे सॉफ़्टवेयर पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है।  ग्लोबल साउथ पर जोर  प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ग्लोबल साउथ के देशों को अपना मार्ग खुद तय करना जरूरी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार ग्लोबल साउथ की चिंताओं को उठाया है। G20 अध्यक्षता के दौरान भी ये मुद्दे मुख्य चर्चा में रहे। मोदी ने कहा कि वैश्विक विकास संतुलित तभी हो सकता है जब दुनिया के बड़े हिस्से पीछे न रहें।  READ MORE: Elon Musk ने मोदी सरकार को कोर्ट में दी चुनौती? जानें क्यों  लोकतंत्र और संसदीय शिक्षा  मोदी ने CSPOC सम्मेलन के व्यापक उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य विभिन्न देशों में संसदीय लोकतंत्र की जानकारी और समझ बढ़ाना है। मोदी ने भारत के लोकतंत्र की मजबूती और विविधता को इसकी ताकत बताया। उन्होंने इसे एक बड़े पेड़ की तरह बताया, जिसकी जड़ें गहरी हैं और शाखाएं बहस, संवाद और सामूहिक निर्णय लेने के लिए फैली हुई हैं।  READ MORE: X पर पीएम मोदी का दबदबा, भारत में सबसे ज्यादा पसंद किए गए पोस्ट  मोदी ने कहा कि भारत सिर्फ टेक्नोलॉजी प्रदाता नहीं है, बल्कि प्रशासन, कानून निर्माण और डिजिटल सिस्टम के अनुभव साझा करने वाला साझेदार बनना चाहता है। इस सम्मेलन में यह संदेश भी गया कि भविष्य में टेक्नोलॉजी और लोकतंत्र को एक साथ विकसित करना जरूरी है, खासकर उन देशों के लिए जो अभी अपनी आधारभूत प्रणाली बना रहे हैं। 
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Are You Alive App: जरा सोचिए… आपका फोन हर दो दिन में आपसे सिर्फ एक सवाल पूछे ‘क्या आप जिंदा हैं? और अगर आप जवाब नहीं देते, तो आपके परिवार या दोस्तों को अलर्ट भेजा जाता है।  यह सुनने में जरा अजीब लगता है, लेकिन चीन में लाखों लोग Are You Dead? ऐप डाउनलोड कर रहे हैं, जो बिल्कुल यही करता है।  Are You Dead?ऐप चीन में लोकप्रिय, अकेले रहने वालों के लिए डिजिटल सुरक्षा का तरीका, जो याद दिलाता है कि आप जिंदा हैं।  ऐप का तरीका आसान और सीधा  Are You Dead? ऐप बहुत आसान है। इसमें कोई चैट, प्रोफाइल या सोशल फीड नहीं है। बस एक बड़ा बटन है जिस पर लिखा है I’m Alive। हर 48 घंटे में यूजर्स को इस पर टैप करना होता है। अगर कोई लगातार दो बार चेक इन करना भूल जाता है, तो ऐप प्री सेलेक्टेड इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को मैसेज भेज देता है। यह मैसेज आपके जानकार को चेतावनी देता है कि शायद कुछ गड़बड़ है।  READ MORE: Apple पर लगा टेक्नोलॉजी चोरी का आरोप, जानें पूरा मामला   किन लोगों के लिए है यह ऐप  यह ऐप खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो अकेले रहते हैं, बड़े शहरों में काम करते हैं या जिनके बच्चे किसी दूसरे शहर में रहते हैं। ऐसे जीवन में कभी–कभी कोई नहीं जान पाता कि कुछ गलत हुआ है। यह ऐप डिजिटल सुरक्षा की एक छोटी चाबी की तरह काम करता है।   विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा फायदा इसकी सरलता और हल्कापन है। यह ध्यान नहीं खींचता, किसी सोशल ऐप की तरह उलझाता नहीं, लेकिन जब जरूरत होती है, तो यह आपके लिए बोलता है।  READ MORE: Nvidia ने Groq की AI चिप टेक्नोलॉजी ली लाइसेंस पर  आधुनिक जीवन और अकेलेपन की कहानी  Are

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