भारत में इन हॉरर गेम्स से जा रही बच्चों की जान

भारत में इन हॉरर गेम्स से जा रही बच्चों की जान

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February 9, 2026

Horror games India: यूपी के गाजियाबाद में हाल ही में तीन बहनों की आत्महत्या की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस घटना ने बच्चों में हॉरर थीम वाले मोबाइल गेम्स के प्रति बढ़ते आकर्षण और उसके प्रभाव पर चिंता बढ़ा दी है। बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब ऐसे गेम्स से जुड़ी घटनाएं सामने आई हों।

गाजियाबाद में 3 बहनों की आत्महत्या ने हॉरर मोबाइल गेम्स और बच्चों की मानसिक सेहत पर चिंता बढ़ा दी है, जानें कौन-कौन से गेम्स शामिल थे।

घटना का विवरण

पुलिस ने बताया कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मोबाइल गेम्स सीधे आत्महत्या का कारण हैं, लेकिन लड़कियों की डायरी में बार-बार इन गेम्स का जिक्र होना एक चिंताजनक बात है। यह खबर बताता है कि बच्चों पर घंटों तक मोबाइल स्क्रीन के इस्तेमाल और हॉरर कंटेंट का क्या असर पड़ सकता है।

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कौन से गेम्स थे शामिल?

जांच में पुलिस को 4 हॉरर गेम्स लगातार देखने को मिले हैं।

  • Poppy Playtime: इस गेम में खिलाड़ी को एक सुनसान और डरावनी खिलौना फैक्ट्री में डाला जाता है। खेल में डरावने डॉल्स, अंधेरे कोने और अचानक डराने वाले सीन होते हैं। मुख्य किरदार Huggy Wuggy किशोरों के लिए है, लेकिन कई बच्चों को यह गेम काफी डरावना लग सकता है।
  • The Baby in Yellow: गेम में खिलाड़ी एक बेबीसिटर बनकर बच्चे की देखभाल करता है। खेल में धीरे-धीरे डरावनी और असामान्य घटनाएं घटती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हॉरर और सामान्य चीजों का मिश्रण छोटे बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है।
  • Evil Nun: इसमें खिलाड़ी एक स्कूल में फंसा होता है, जहां एक डरावनी नन है। खिलाड़ी को वहां से बचने के रास्ते खोजने होते हैं।
  • Ice Scream: इस गेम में खलनायक बच्चों को किडनैप करता है और आइसक्रीम बेचने का बहाना करता है। यह बच्चों में डर और चिंता पैदा कर सकता है, भले ही ग्राफिक्स कार्टून जैसी दिखें।

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

शिक्षा अधिकारी और मनोवैज्ञानिक माता-पिता को सुझाव दे रहे हैं कि वे बच्चों की गेमिंग गतिविधियों पर नजर रखें। गेम्स की उम्र अनुसार रेटिंग, स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गतिविधियों पर ध्यान देना जरूरी है। लगातार हॉरर कंटेंट किशोरों की मानसिक और भावनात्मक सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

गाजियाबाद मामले में बहनें 16, 14 और 12 साल की थीं। वे अपने फोन पर लंबे समय तक रहती थीं। जांच में उनकी डिजिटल आदतें, मानसिक तनाव और स्वास्थ्य का विश्लेषण किया जा रहा है, लेकिन किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।

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माता-पिता के लिए सुझाव

  • बच्चों के फोन पर निगरानी रखें।
  • जानें कि वे ऑनलाइन क्या कर रहे हैं।
  • अगर बच्चा withdrawn, anxious या अलग व्यवहार करने लगे, तो तुरंत ध्यान दें।
  • जल्दी मदद लेने से बड़ा फर्क पड़ सकता है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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