Tether BrainWhisperer: दुनिया की सबसे बड़ी स्टेबलकॉइन कंपनी Tether अब एक बिल्कुल नए क्षेत्र में काम कर रही है। अब तक यह कंपनी क्रिप्टोकरेंसी के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब यह इंसान और मशीन के बीच सीधी बातचीत करने वाली तकनीक पर काम कर रही है। इसके लिए कंपनी की टेक्नोलॉजी यूनिट Tether Evo ने एक नया रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसका नाम BrainWhisperer है।
Tether का नया BrainWhisperer सिस्टम दिमाग से आने वाले सिग्नल को टेक्स्ट में बदलने की कर रहा कोशिश।
क्या है BrainWhisperer का मकसद
BrainWhisperer का उद्देश्य इंसान के दिमाग से आने वाले सिग्नल को पढ़कर उन्हें सीधे टेक्स्ट में बदलने की कोशिश करनी है। इसमें AI की मदद से काम करने वाले ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस इम्प्लांट का इस्तेमाल किया जाता है। यह तकनीक खासतौर पर उन लोगों के लिए बहुत मददगार हो सकती है जिन्हें बोलने में दिक्कत होती है या जो ठीक से अपनी बात नहीं कह पाते। इस सिस्टम ने दिमाग से आने वाले सिग्नल को समझकर कुछ वाक्यों को सही तरीके से टेक्स्ट में बदला है। इस प्रक्रिया में BrainWhisperer ने करीब 98.3 प्रतिशत सटीकता हासिल की, जो इस तकनीक के लिए काफी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
Brain OS क्या है
Tether इस तकनीक को सिर्फ एक टूल तक सीमित नहीं रखना चाहती। कंपनी ने इसके लिए एक बड़ा सिस्टम तैयार किया है जिसका नाम Brain OS है। यह एक ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म है जिसे Tether के QVAC AI प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है। Brain OS का उद्देश्य ब्रेन इम्प्लांट, वियरेबल डिवाइस और AI को एक साथ जोड़ना है।
इसका मकसद खासकर उन लोगों की मदद करना है जिन्हें किसी तरह की शारीरिक परेशानी है या जो बोल नहीं सकते। इस सिस्टम में प्राइवेसी का भी खास ध्यान रखा गया है। यूजर के दिमाग से आने वाले सिग्नल सीधे उसी डिवाइस पर प्रोसेस किए जाते हैं ताकि डेटा बाहर न जाए और सुरक्षित रहे।
BrainWhisperer कैसे काम करता है
BrainWhisperer दिमाग से आने वाले सिग्नल को पढ़कर उन्हें टेक्स्ट में बदलता है। यह तकनीक OpenAI के Whisper मॉडल से प्रेरित है, लेकिन इसमें कई नए सुधार किए गए हैं। इस सिस्टम में दिमाग के सिग्नल को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जाता है और फिर AI उन्हें बेहतर तरीके से समझकर शब्दों में बदलता है।
इस तकनीक ने Brain-to-Text ’25 Kaggle प्रतियोगिता में भी अच्छा प्रदर्शन किया। इसमें 466 प्रतिभागियों में BrainWhisperer चौथे स्थान पर रहा और इसका वर्ड एरर रेट सिर्फ 1.78 प्रतिशत रहा। इस सिस्टम में हर डेटा सेट के लिए 5 अलग-अलग AI मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है और उन्हें लगभग 100 बार ट्रेन किया जाता है। इसके बाद यह स्पीच के छोटे हिस्सों यानी फोनीम्स को शब्दों में बदल देता है।
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सटीकता बढ़ाने और सर्जरी से बचने की कोशिश
Tether Evo का कहना है कि AI की मदद से वह 99.4 प्रतिशत तक की सटीकता हासिल कर चुका है। इस तकनीक में पहले ECoG और EEG जैसे तरीकों से दिमाग के सिग्नल पकड़े जाते हैं। फिर उन्हें बेसिक स्पीच साउंड यानी फोनीम में बदला जाता है और बाद में उन फोनीम्स को शब्दों में बदल दिया जाता है। कंपनी ऐसे तरीकों पर भी काम कर रही है जिनमें सर्जरी की जरूरत न पड़े।
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Tether का क्रिप्टो कारोबार
रिपोर्ट के मुताबिक, Tether की मार्केट वैल्यू करीब 184 अरब डॉलर है और इसकी सप्लाई भी लगभग 184 अरब USDT है। यह स्टेबलकॉइन आमतौर पर 1 डॉलर के आसपास ट्रेड करता है। Tether की ज्यादातर सप्लाई कुछ बड़े ब्लॉकचेन नेटवर्क पर है। इनमें सबसे ज्यादा हिस्सा Tron पर है जहां करीब 46 प्रतिशत USDT मौजूद है। इसके बाद Ethereum पर लगभग 43 प्रतिशत सप्लाई है। इसके अलावा Binance Smart Chain पर करीब 5 प्रतिशत और Solana पर लगभग 1.7 प्रतिशत USDT मौजूद है। बाकी थोड़ा हिस्सा अन्य ब्लॉकचेन पर फैला हुआ है।
