IMF crypto warning: वित्तीय व्यवस्था बहुत तेजगति से डिजिटल बदलाव की ओर बढ़ रहा है। जिसमें टोकनाइजेशन की बडी भूमिका होने की बात बताई जा रही है। लेकिन इस बदलाव के बीच IMF ने चेतावनी दे दी है। उनका कहना है कि टोकनाइजेशन से वैश्विक वित्तीय बाजारों में क्रिप्टो से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। पुरानी क्रिप्टो करेंसी को भूल जाइए। अब तो अस्थिरता और सिस्टम रिस्क बढ़ाने की बात भी सामने आ रही है। तो आइए जानते हैं इसके बारे में और विस्तार से।
क्रिप्टो और पारंपरिक वित्त के मेल से बाजार में तेजी तो आएगी, लेकिन इससे अस्थिरता और तेज गिरावट का खतरा भी बढ़ेगा। जानें पूरा बात विस्तार से।
क्वांटम युग की तैयारी में नई पहल
क्रिप्टो सेक्रटर में भी तकनीकी बदलाव चल रहा है। सर्कल द्वारा विकसित लेयर-1 ब्लॉकचेन आर्क को विशेष तौर Stablecoins फाइनेंस और संस्थागत उपयोग के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है आनेवाले समय में यह क्वांटम कंप्यूटर हमलों से निपटने के लिए Post Quantum Signatures तकनीक का उपयोग करेगा। यानी आनेवाले समय में मौजूदा Blockchain कमजोर पड़ सकता है। तब यह एक मजबूत विकल्प बनने का कोशिश करेगा। इसके अलावे आर्क ने यह भी बताया कि अपडेट में मेननेट लॉन्च की समय-सीमा का उल्लेख नहीं किया गया।
एटॉमिक सेटलमेंट से बढ़ेगी रफ्तार
वहीं आईएमएफ का कहना है कि टोकनाइजेशन द्वारा वित्तीय जगत में लाया गया एटॉमिक सेटलमेंट एक महत्वपूर्ण पहलु है। इससे लेनदेन तुरंत पूरा हो जाता है। इससे काउंटरपार्टी जोखित काफी कम हो सकता है। लेक्विडीटी हर समय मैनेज करनी पड़ती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तनावपूर्ण घटनाएं तेजी से घटित होने की संभावना है। इसका मतलब है कि बाजार में होनेवाली किसी भी हलचल का असर तुरंत दिखने लगेगा। हस्तक्षेप और बचाव का मौका कम रह जाएगा।
स्टेबलकॉइन पुल भी, जोखिम भी
जिसकी स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए टोकनाइज्ड परिसंपत्ति प्रबंधन सुरक्षित सेटलमेंट परिसंपत्तियों, कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त अंतिम स्थिति और मजबूत शासन व्यवस्था पर आधारित रहे। रिपोर्ट की माने तो स्टेबलकॉइन को पारंपरिक औऱ डिजिटल वित्त के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जाता है। ये टोकन आमतौर पर किसी फिएट करेंसी से जुड़े होते हैं। ये टोकनाइज्ड प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले सेटलमेंट के लिए इस्तेमाल किए जा सकते है।
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ऑटोमेशन से बढ सकती है गिरावट
आईएमएफ ने यह भी चेतावनी दी है कि अत्याधिक ऑटोमेटेड बाजारो में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है। अस्थिरता को बढ़ा सकते हैं। वहीं, मार्जिन कॉल या परिसमापन को ट्रिगर करने वाले स्मार्ट अनुबंध मंदी के दौरान बिकवाली को तेज कर सकते हैं। क्रिप्टो बाजारों में इस तरह की तीव्र गिरावट देखी गई है। इसके अलावे, यह कहा है कि टोकनाइज्ड परिसंपत्तियां तुरंत विभिन्न क्षेत्राधिकारों में स्थानांतरित हो सकती हैं, जिससे निगरानी मुश्किल हो जाती है और उभरते बाजारों में पूंजी पलायन और मुद्रा प्रतिस्थापन के बारे में चिंताएं बढ़ जाती हैं। आईएमएफ ने खासतौर पर उभरते बाजारों में पूंजी के तेजी से बाहर जानें और स्थानीय मुद्रा के स्थान पर अन्य विकल्प को इस्तेमाल करने पर चिंता जताई है।
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समन्वय के बिना बढ़ सकती है असमानता
आईएमएफ का मानना है कि इस नई व्यवस्था से स्पष्ट कानूनी ढांचे और मजबूत वैश्विक समन्वय का नहीं हुआ तो टोकनाइज्ड वित्तीय प्रणाली बिखर सकती है। सुधार करने के बजाय विखंडन को और असमानता ला सकता है। क्रिप्टो क्षेत्र में टोकनाइजेशन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, ब्लॉकचेन रेल में जोड़ी गई वास्तविक दुनिया की परिसंपत्तियों का मूल्य पहले ही 23.2 बिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है। जो इस ट्रेड को तेजी से दर्शाती है।
