ugc

UGC नियमों पर केंद्र का बड़ा कदम, नए सिरे से होगी समीक्षा

7 mins read
14 views
November 5, 2026

UGC के नए नियमों की फिर होगी समीक्षा, केंद्र बना सकता है कमेटी, SC में सुनवाई टली।

UGC Equity Regulations: विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए UGC Equity Regulations 2026 पर फिर से विचार हो सकता है। केंद्र सरकार इन नियमों की समीक्षा के लिए एक नई कमेटी बनाने पर विचार कर रही है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र ने यह जानकारी दी। सरकार चाहती है कि ऐसा नियम बने, जिससे हर वर्ग के छात्रों को समान अधिकार और सुरक्षा मिल सके। अब इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ को बताया कि केंद्र सभी छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर नया ढांचा तैयार करना चाहता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि सभी छात्रों के अधिकारों और हितों की रक्षा होनी चाहिए।

क्या हैं UGC Equity Regulations 2026?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने जनवरी में Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 की अधिसूचना जारी की थी। इन नियमों ने 2012 के पुराने नियमों की जगह ली थी। इनका मकसद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना और सभी छात्रों को बराबर मौके देना है, लेकिन नियमों के एक हिस्से Regulation 3(1)(c) पर विवाद शुरू हो गया। इसमें SC, ST और OBC वर्ग के लोगों के खिलाफ जातिगत भेदभाव को परिभाषित किया गया है।

READ MORE: 12वीं के बाद AI में करियर बनाएं, इन IIT में लें एडमिशन

सामान्य वर्ग के छात्रों को लेकर क्यों उठा सवाल?

नियमों का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसमें सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव की बात को ठीक से शामिल नहीं किया गया है। उनका मानना है कि इस प्रावधान का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है। वहीं, नियमों का समर्थन करने वालों का कहना है कि कॉलेजों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए सख्त नियम जरूरी हैं। इससे कमजोर वर्ग के छात्रों को सुरक्षित माहौल मिल सकता है।

READ MORE: Claude AI में आया नया फीचर, गलत चैट पर रखेगा नजर

सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर क्यों लगाई रोक?

सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में नए नियमों पर रोक लगा दी थी। कोर्ट को नियमों की भाषा साफ नहीं लगी और उनके गलत इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई। कोर्ट ने कहा था कि अगले आदेश तक 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। केंद्र ने अगस्त में भी कोर्ट को बताया था कि वह इन नियमों पर दोबारा विचार कर रहा है। रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं ने भी दाखिल की थी याचिका यह मामला Abeda Salim Tadvi vs Union of India समेत कई याचिकाओं से जुड़ा है।

रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं ने 2019 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपने बच्चों की मौत के बाद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की मांग की थी। अब चार सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई में केंद्र सरकार अपनी समीक्षा कमेटी को लेकर आगे की जानकारी दे सकती है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

Don't Miss