Income Tax Act: 1 अप्रैल से नया Income-tax Act लागू हो गया है। पहली नजर में यह बदलाव सामान्य लग सकता है क्योंकि टैक्स रेट्स में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। इसी वजह से कई कंपनियां मान रही हैं कि सब कुछ पहले जैसा ही चलेगा, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट CA निशांत शंकर का कहना है कि असली चुनौती कानून में नहीं, बल्कि कंपनियों के काम करने के तरीके में है।
Income-tax Act लागू होने के बाद कंपनियों के लिए असली चुनौती टैक्स रेट नहीं बल्कि सिस्टम अपडेट, TDS मैपिंग और डॉक्यूमेंट सुधार में है, जानिए कैसे छोटी गलती बन सकती है बड़ी परेशानी।
सिस्टम अपडेट नहीं किया तो बढ़ेगा जोखिम
कई कंपनियां अभी भी अपने पुराने सिस्टम और दस्तावेज़ों में Income-tax Act, 1961 के नियमों का इस्तेमाल कर रही हैं। इसमें ERP सिस्टम, टैक्स मैनुअल, SOPs और इंटर-कंपनी एग्रीमेंट शामिल हैं। अगर इन सभी को नए कानून के हिसाब से अपडेट नहीं किया गया, तो आगे चलकर टैक्स फाइलिंग में गड़बड़ी हो सकती है। इसका सीधा असर यह होगा कि कंपनियों को नोटिस, करेक्शन और विवाद झेलने पड़ सकते हैं।
TDS में छोटी गलती भी बन सकती है बड़ी समस्या
TDS में भी कंपनियों को सावधान रहने की जरूरत है। कई बार कंपनियां टैक्स सही काटती हैं, लेकिन उनके सिस्टम में पुराना सेक्शन ही दर्ज रहता है। जब नई व्यवस्था के तहत TDS रिटर्न फाइल की जाती है, तो सिस्टम में बेमेल दिखाई देता है। यही गलती आगे चलकर इनकम टैक्स विभाग से नोटिस का कारण बन सकती है।
कैपिटल गेन की गणना में हो सकती है गड़बड़ी
नए कानून के बाद कैपिटल गेन की गणना के नियमों में बदलाव आ सकता है। अगर कंपनी पुराने टेम्पलेट के आधार पर काम करती रही, तो गेन की कैटेगरी गलत हो सकती है। उदाहरण के लिए, कोई कंपनी किसी लाभ को LTCG मानकर सूचीकरण का फायदा ले सकती है, जबकि नए नियमों में उसकी कैटेगरी अलग हो।
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लॉस सेट-ऑफ में भी हो सकती है गलती
कंपनियां अक्सर पिछले साल के लॉस को एडजस्ट करती हैं, लेकिन अगर मैपिंग सही नहीं हुई, तो गलती हो सकती है। जैसे कि Long Term Capital Loss को Short Term Capital Gain के खिलाफ सेट-ऑफ करना, जो नियमों के अनुसार गलत है। ऐसी छोटी गलती भी टैक्स विवाद का कारण बन सकती है।
‘सब कुछ पहले जैसा है’ सोच बन सकती है खतरा
सबसे बड़ा जोखिम यही है कि कंपनियां इस बदलाव को हल्के में ले रही हैं सिर्फ इसलिए कि टैक्स रेट्स नहीं बदले, इसका मतलब यह नहीं कि पूरा सिस्टम भी पहले जैसा रहेगा। अगर अभी से जरूरी बदलाव नहीं किए गए, तो बार-बार नोटिस आ सकते हैं और कंपनियों को बार-बार रिटर्न सुधारना पड़ सकता है।
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कंपनियां अभी क्या करें?
इस स्थिति से बचने के लिए कंपनियों को तुरंत कुछ कदम उठाने चाहिए
- ERP और टैक्स सॉफ्टवेयर को अपडेट करें
- सभी डॉक्यूमेंट्स और एग्रीमेंट्स की जांच करें
- TDS और कैपिटल गेन की सही मैपिंग करें
- फाइनेंस टीम को नए नियमों की ट्रेनिंग दें
