AI Disruption India IT: भारत की IT सर्विस इंडस्ट्री, जो हर साल 200 अरब डॉलर से ज्यादा का निर्यात करती है, आने वाले सालों में AI की तेज प्रगति के कारण दबाव का सामना कर सकती है। Citrini Research की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2027 तक TATA Consultancy Services, Infosys और Wipro जैसी बड़ी कंपनियों के कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं और उनकी सेवाओं की कीमतों पर दबाव आ सकता है। इसकी मुख्य वजह AI आधारित कोडिंग टूल्स हैं, जिनसे कंपनियों को कम मानव प्रोग्रामर्स की जरूरत पड़ेगी।
AI कोडिंग टूल्स के कारण वैश्विक कंपनियां कम मानव प्रोग्रामर्स पर निर्भर हो सकती हैं। इससे भारत की IT निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था, रुपये की स्थिरता और बड़े IT कॉन्ट्रैक्ट्स पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
भारत के IT निर्यात मॉडल पर असर
भारत की टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री देश के करंट अकाउंट सरप्लस में सबसे बड़ा योगदान देती है। लंबे समय से इसका आधार यह रहा है कि भारतीय डेवलपर्स पश्चिमी देशों के मुकाबले कम लागत पर काम करते हैं। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि AI कोडिंग एजेंट्स लागू करने की लागत तेजी से घट रही है, जिससे यह लागत लाभ तेजी से कम होता जा रहा है।
AI कोडिंग एजेंट्स से घटती लागत
रिपोर्ट The 2028 Global Intelligence Crisis: A Thought Exercise in Financial History में कहा गया है कि भविष्य में AI कोडिंग की सीमांत लागत लगभग बिजली की लागत जितनी कम हो सकती है। पहले जहां बड़ी आउटसोर्स्ड कोडिंग टीमों की जरूरत होती थी, अब कंपनियां बड़े पैमाने पर AI आधारित डेवलपमेंट टूल्स अपना रही हैं।
इस बदलाव से वैश्विक कंपनियां लंबे समय के IT आउटसोर्सिंग कॉन्ट्रैक्ट्स की बजाय ऑटोमेटेड कोडिंग सिस्टम अपनाने लग सकती हैं। इससे भारतीय IT कंपनियों के कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने और कीमतों में गिरावट का खतरा बढ़ सकता है।
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भारत क्यों ‘इनवर्स AI बेनिफिशियरी’ माना जा रहा है
रिपोर्ट के अनुसार, AI बदलाव के दौर में भारत की संरचनात्मक स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है। जिन देशों में AI इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर निर्माण और डेटा सेंटर विस्तार तेजी से हो रहा है, उन्हें इस बदलाव से लाभ मिल सकता है। इसके विपरीत भारत का IT निर्यात मॉडल मुख्य रूप से मानव श्रम पर आधारित है।
अगर सेवाओं का निर्यात कमजोर पड़ता है, तो इससे भारत के बाहरी आर्थिक संतुलन पर दबाव पड़ सकता है। रिपोर्ट के एक काल्पनिक परिदृश्य में कहा गया है कि चार महीनों में रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 18% तक गिर सकती है। बढ़ते आर्थिक दबाव की स्थिति में 2028 की शुरुआत तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ प्रारंभिक बातचीत की नौबत भी आ सकती है।
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वैश्विक IT खर्च में बड़ा संरचनात्मक बदलाव
रिपोर्ट का मुख्य विचार ‘प्रतिस्थापन’ है। मशीन इंटेलिजेंस के विकास के साथ AI पारंपरिक कोडिंग कार्यों को तेज, सस्ते और अधिक कुशल तरीके से कर सकता है। जहां पहले इंजीनियरों की बड़ी टीमों की जरूरत होती थी, अब स्वायत्त सिस्टम वही काम कर सकते हैं।
Citrini के अनुसार, यह केवल अस्थायी मंदी नहीं बल्कि एक संरचनात्मक बदलाव हो सकता है। यदि AI अपनाने की गति उम्मीद से ज्यादा तेज रही, तो भारत के आउटसोर्सिंग आधारित IT मॉडल को जल्दी ही नए रूप में ढालना होगा।
