AI Drift Reality Myth : क्या AI हमारी मदद कर रहा है या धीरे-धीरे हमारी इंसानी क्षमताएं कम कर रहा है? न्यूयॉर्क सिटी की सबवे सुरंगों में शुरू हुई एक नई मुहिम ने इसी सवाल को सामने रखा है। इसका नाम है ‘Stop the AI Drift’। यह अभियान Centre for Humane Technology यानी CHT ने शुरू किया है। संगठन का मकसद AI और सोशल मीडिया जैसी तकनीकों को इंसानों के हित में इस्तेमाल करने पर जोर देना है। अभी यह अभियान करीब एक महीने तक न्यूयॉर्क के सबवे स्टेशनों और ट्रेन के डिब्बों में चलेगा।
‘Stop the AI Drift’ अभियान AI के बढ़ते इस्तेमाल पर सवाल उठाता है, जानें AI Drift का मतलब और इंसानी कौशल को लेकर चिंता क्या है।
AI Drift क्या है और इसका मतलब क्या है?
AI Drift का मतलब है AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण इंसानी क्षमताओं का धीरे-धीरे कमजोर होना। CHT की वरिष्ठ निदेशक कैमिली कार्लटन के मुताबिक, लोग जब सोचने, बातचीत करने, लिखने और फैसले लेने जैसे काम AI को सौंपते हैं, तो इसकी एक कीमत चुकानी पड़ सकती है। यह कीमत हमेशा पैसे में नहीं होती। कुछ कौशल, रिश्ते और रोजमर्रा के कामों से मिलने वाला अनुभव भी धीरे-धीरे कम हो सकता है। अभियान के पोस्टर इसी बात को आसान सवालों के जरिए सामने रखते हैं। जैसे, ‘आप अपने थेरेपिस्ट को नहीं बताएंगे, लेकिन AI को बताएंगे?’ और ‘आपके बच्चे ने निबंध लिखा या AI ने?’ इन सवालों का मकसद लोगों को AI इस्तेमाल करने से रोकना नहीं है। CHT चाहता है कि लोग यह समझें कि वे किस तरह और किन कामों के लिए AI पर निर्भर हो रहे हैं।
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स्मार्टफोन जैसा असर AI से भी दिख सकता है?
AI Drift की तुलना स्मार्टफोन के असर से भी की जा रही है। पहले लोग कई फोन नंबर याद रखते थे। अब स्मार्टफोन और Siri जैसे डिजिटल सहायक सीधे संपर्क करने का काम कर देते हैं। इसी तरह AI अब शादी की शपथ लिख सकता है, निजी रिश्तों से जुड़े विवादों में सलाह दे सकता है और होमवर्क या ऑफिस के काम में मदद कर सकता है। कैमिली कार्लटन का कहना है कि AI लोगों के लिए हर समय उपलब्ध है। ऐसे में एक छोटे काम के लिए शुरू हुई निर्भरता धीरे-धीरे जीवन के दूसरे और ज्यादा निजी हिस्सों तक पहुंच सकती है। CHT के मुताबिक, संगठन लोगों को AI इस्तेमाल करने के लिए दोषी नहीं ठहराता। समस्या तब सामने आती है, जब इंसान बिना सोचे हर काम के लिए AI पर निर्भर होने लगता है।
AI Drift और Model Drift में क्या फर्क है?
AI Drift नाम Model Drift से मिलता-जुलता है। मशीन लर्निंग में Model Drift उस स्थिति को कहा जाता है, जब वास्तविक दुनिया के नए डेटा के संपर्क में आने के बाद किसी मॉडल की सटीकता धीरे-धीरे कम होने लगती है, लेकिन AI Drift में बात मशीन की नहीं, इंसान की हो रही है। यहां सवाल यह है कि AI पर लगातार निर्भर रहने से इंसानी सोचने, बनाने और खुद फैसले लेने की क्षमता पर क्या असर पड़ सकता है।
CHT का कहना है कि खतरा सिर्फ AI के किसी बड़े या अचानक होने वाले नुकसान में नहीं है। एक धीमी प्रक्रिया भी लोगों की आत्मनिर्भरता और जीवन से मिलने वाली खुशी को प्रभावित कर सकती है। अमेरिका के कॉलेज कैंपसों में भी ऐसी चिंताएं सामने आ रही हैं। कुछ छात्र AI का इस्तेमाल पढ़ाई और निजी मामलों में इतना कर रहे हैं कि बिना इसके काम करना मुश्किल महसूस करते हैं।
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छात्रों पर AI निर्भरता की चिंता क्यों बढ़ी?
कुछ छात्रों ने अभियान से जुड़े लोगों को बताया कि वे AI का इस्तेमाल करने को लेकर असहज महसूस करते हैं। फिर भी उन्हें डर रहता है कि अगर वे AI नहीं इस्तेमाल करेंगे तो बाकी छात्रों से पीछे रह जाएंगे। MIT की एक हालिया रिसर्च रिपोर्ट में भी छात्रों के AI चैटबॉट इस्तेमाल करने के पीछे समय सीमा और काम पूरा करने की चिंता जैसे कारण सामने आए। रिपोर्ट ने माना कि AI पढ़ाई को ज्यादा उत्पादक बनाने और सीखने में मदद कर सकता है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी हैं। MIT ने कहा कि AI वैज्ञानिक शोध और शिक्षा को बदल रहा है, लेकिन इससे सीखने की प्रक्रिया, पढ़ाने के तरीके और कैंपस के सामाजिक माहौल पर जोखिम भी पैदा हो सकते हैं।
AI को लेकर बड़े खतरे की दूसरी बहस भी जारी है। Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने AI से बड़ी संख्या में नौकरियां प्रभावित होने की चेतावनी दी है। वहीं, उनके एक पूर्व सहयोगी ने AI से मानवता को खतरा होने की बात कही थी। CHT की चिंता इससे अलग है। संगठन के मुताबिक, इंसानों की क्षमताओं का धीरे-धीरे खत्म होना भी गंभीर समस्या हो सकती है।
