Crypto Token Buybacks : 2026 में डिजिटल एसेट कंपनियों ने अब तक करीब 638 मिलियन डॉलर अपने ही टोकन खरीदने में खर्च किए हैं। लंबे समय से कमजोर चल रहे क्रिप्टो बाजार में कंपनियां अब शेयर बाजार जैसी बायबैक रणनीति अपना रही हैं। Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आंकड़ा 25 अगस्त 2026 तक का है। इसे ब्लॉकचेन एनालिटिक्स कंपनी Allium Labs ने तैयार किया है। पिछले साल इसी अवधि में करीब 545 मिलियन डॉलर खर्च हुए थे। वहीं 2024 में पूरे साल यह रकम सिर्फ करीब 3.66 लाख डॉलर थी। इस पूरे ट्रेंड में दो नाम सबसे आगे हैं। Hyperliquid और Pump.fun मिलकर 2026 के कुल टोकन बायबैक का करीब 90% हिस्सा बनाते हैं।
क्रिप्टो टोकन Buybacks में इस साल बड़ा उछाल, 638 मिलियन डॉलर के Buybacks में Hyperliquid और Pump.fun की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही।
क्रिप्टो टोकन बायबैक में Hyperliquid सबसे आगे
इस साल टोकन बायबैक में Hyperliquid सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। Perpetuals एक्सचेंज अपने ट्रेडिंग फीस से मिलने वाले राजस्व का 99% हिस्सा HYPE टोकन खरीदने और फिर उसे खत्म करने में लगाता है। Hyperliquid ने दिसंबर 2024 में HYPE टोकन लॉन्च किया था। इसके बाद से प्रोटोकॉल करीब 1.3 बिलियन डॉलर मूल्य के HYPE टोकन खरीद चुका है। पिछले एक साल में HYPE की कीमत करीब 70% बढ़ी है। यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब बाजार के ज्यादातर दूसरे डिजिटल एसेट दबाव में रहे हैं। Bitwise Asset Management के CIO Matt Hougan के मुताबिक, HYPE की तेजी की सबसे बड़ी वजह इसका आक्रामक बायबैक कार्यक्रम है। उनका कहना है कि इससे प्रोटोकॉल की बढ़ती गतिविधि से मिलने वाले फायदे सीधे टोकन की वैल्यू तक पहुंचते हैं।
Pump.fun, Sky और Lido भी बायबैक की राह पर
Solana आधारित लॉन्चपैड Pump.fun भी बड़े पैमाने पर अपने PUMP टोकन की खरीदारी कर रहा है। प्लेटफॉर्म अपनी फीस से मिलने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा बायबैक में लगा रहा है। Hyperliquid और Pump.fun को मिलाकर Allium Labs के आंकड़ों में 2026 के कुल बायबैक का बड़ा हिस्सा आता है। इसके अलावा Sky Protocol भी इस रणनीति पर आगे बढ़ा है। Sky Protocol पहले MakerDAO के नाम से जाना जाता था। इसने बताए गए समय में करीब 26 मिलियन डॉलर के SKY टोकन खरीदे हैं।
Sky के सह-संस्थापक Rune Christensen के मुताबिक, प्रोजेक्ट ने पिछले एक साल में 400 मिलियन डॉलर से ज्यादा का राजस्व कमाया। उनका कहना है कि बायबैक का मकसद टोकन रखने वाले लोगों को प्रोटोकॉल के लंबे समय के प्रदर्शन से जोड़ना है। SKY की कीमत भी पिछले 12 महीनों में करीब 8% बढ़ी है। यह बायबैक करने वाले चुनिंदा टोकन में से एक है, जिसने साल-दर-साल बढ़त दर्ज की है।
Lido ने भी अगस्त में नियमित बायबैक की योजना बताई। इसके लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं। इनमें सालाना कम से कम 40 मिलियन डॉलर के राजस्व तक पहुंचना शामिल है। हालांकि, LDO टोकन की तस्वीर अलग है। पिछले एक साल में इसकी कीमत करीब 71% गिर चुकी है और यह अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है।
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हर बायबैक से टोकन की कीमत नहीं बढ़ी
बायबैक और टोकन की कीमत के बीच सीधा संबंध हमेशा नहीं दिखा है। इसका बड़ा उदाहरण Jupiter है। इस Decentralised Exchange aggregator ने 2026 में अब तक करीब 14 मिलियन डॉलर JUP टोकन खरीदने में खर्च किए हैं। इसके बावजूद JUP की कीमत पिछले एक साल में करीब 55% नीचे है। साल की शुरुआत में Jupiter के संस्थापकों ने भी बायबैक जारी रखने पर सार्वजनिक रूप से चर्चा की थी। वजह थी कि 2025 में इस रणनीति का कीमत पर ज्यादा असर नहीं दिखा। Chainlink ने भी अपने ऑनचेन रिजर्व कार्यक्रम के तहत बायबैक किया है। लेकिन LINK की कीमत पिछले 12 महीनों में करीब आधी रह गई है।
Helium ने तो फरवरी में अपना बायबैक कार्यक्रम रोक दिया। इसके सह-संस्थापक Amir Haleem ने कहा था कि बाजार टोकन खरीदने वाली परियोजनाओं को खास इनाम देता नहीं दिख रहा था। इसलिए टीम ने इस रणनीति पर पैसा खर्च करना सही नहीं समझा। Allium Labs के रिसर्च प्रमुख Elton Shehdula के मुताबिक, बायबैक से प्रोजेक्ट में भरोसे का संकेत मिल सकता है और बाजार में मौजूद टोकन की संख्या घट सकती है। लेकिन सिर्फ बायबैक किसी प्रोजेक्ट को मजबूत नहीं बना देता।
क्रिप्टो बाजार अब सिर्फ हाइप पर निर्भर नहीं
क्रिप्टो रिसर्च फर्म Keyrock के शोधकर्ता Amir Hajian के मुताबिक, वह दौर अब खत्म हो रहा है जब सिर्फ हाइप के दम पर टोकन तेजी से ऊपर जाते थे। अब निवेशक यह देख रहे हैं कि किसी टोकन से वास्तविक आर्थिक फायदा क्या मिल रहा है। इसी वजह से कुछ प्रोजेक्ट अपने टोकन को शेयर की तरह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। Decentralised exchange THORChain इसका उदाहरण है। यहां टोकन को स्टेक करने वाले लोगों को प्रोटोकॉल के राजस्व का 55% हिस्सा मिल सकता है। इसके अलावा 20% आय बायबैक में लगाई जाती है। फिर भी THORChain के टोकन की कीमत पिछले एक साल में करीब आधी हो गई है। इससे साफ है कि बेहतर टोकनॉमिक्स भी हमेशा बाजार की गिरावट को रोक नहीं पाती।
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आगे क्या होगा?
क्रिप्टो बाजार का मौजूदा माहौल भी बायबैक रणनीति के लिए चुनौती बना हुआ है। Bitcoin हाल में 78,000 डॉलर से नीचे कारोबार करता दिखा। अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बदली उम्मीदों का असर भी डिजिटल एसेट पर पड़ा। XRP और Solana जैसे कई बड़े altcoins में भी पिछले एक साल में ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। अमेरिकी ट्रेजरी की हालिया बॉन्ड मार्केट कार्रवाई के बाद डॉलर को लेकर चिंता बढ़ी तो क्रिप्टो कीमतों को थोड़ी देर के लिए सहारा मिला। लेकिन बाजार अभी भी 2025 के अंत के स्तरों से काफी नीचे है। अब सवाल यह है कि क्या कंपनियां मौजूदा रफ्तार से अपने टोकन खरीदती रहेंगी। इसका जवाब उनके राजस्व और पूरे क्रिप्टो बाजार की दिशा पर निर्भर करेगा।
बायबैक बाजार में उपलब्ध टोकन की संख्या घटा सकता है और निवेशकों को पूंजी लौटाने का तरीका बन सकता है। लेकिन 2026 के आंकड़े दिखाते हैं कि सिर्फ टोकन खरीदना कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं है। असली ताकत अब भी प्रोजेक्ट की कमाई, उपयोग और बाजार में वास्तविक मांग पर निर्भर करती है।
