Tata Sons Chairman: Tata Sons के चेयरमैन चंद्रशेखरन 18 अगस्त की सालाना आम बैठक से पहले इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं। वजह उनके दोबारा निदेशक बनने को लेकर चल रही अनिश्चितता है। चंद्रशेखरन का मौजूदा चेयरमैन कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन उनके चेयरमैन बने रहने के लिए Tata Sons के निदेशक के तौर पर उनका दोबारा चुना जाना जरूरी है। इस पर 18 अगस्त को शेयरधारक वोट करेंगे।
एन चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति पर क्यों उठे सवाल?
रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखरन ने अपने करीबी सहयोगियों के साथ पद छोड़ने की संभावना पर चर्चा की है। वह चाहते हैं कि उनके भविष्य का फैसला किसी विवादित बैठक में न हो। मामला Tata Sons और Tata Trusts के बीच मतभेद से भी जुड़ा है। Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata और चंद्रशेखरन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं। इससे पहले 2026 में Tata Sons ने चंद्रशेखरन की चेयरमैन के रूप में दोबारा नियुक्ति पर फैसला टाल दिया था। Reuters के अनुसार, Noel Tata ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था।
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Tata Sons और Tata Trusts के बीच क्या विवाद है?
Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66% हिस्सेदारी है इसलिए दोनों संस्थाओं के रिश्ते Tata Group के लिए बेहद अहम हैं। दोनों पक्षों के बीच Tata Sons के बोर्ड में प्रतिनिधित्व, समूह की रणनीति और Shapoorji Pallonji Group की हिस्सेदारी से जुड़े मुद्दों पर मतभेद बताए गए हैं। इस विवाद का असर बोर्ड स्तर पर भी पड़ा है। मतभेद के बीच Tata Sons के एक निदेशक को बोर्ड से हटाया गया। Tata Sons Tata Group की प्रमुख निवेश कंपनी है। इसके तहत TCS, Tata Motors और Air India जैसी बड़ी कंपनियां आती हैं। ऐसे में चंद्रशेखरन का भविष्य पूरे समूह के लिए अहम माना जा रहा है।
TCS से Tata Sons तक लंबा सफर
चंद्रशेखरन का Tata Group से रिश्ता करीब चार दशक पुराना है। उन्होंने 1987 में समूह जॉइन किया था। इसके बाद वह Tata Consultancy Services यानी TCS के CEO बने। उन्होंने 2009 में TCS की कमान संभाली और कंपनी को तेजी से बढ़ाया। 2017 में उन्होंने Tata Sons के चेयरमैन का पद संभाला। उन्होंने Ratan Tata के बाद यह जिम्मेदारी ली थी। उनके कार्यकाल में Tata Group ने कई क्षेत्रों में विस्तार किया। हालांकि, समूह की कुछ कंपनियों को हाल में चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। Air India को लेकर नियामकीय दबाव, TCS में आईटी सेक्टर की कीमतों का दबाव और Jaguar Land Rover पर साइबर हमले जैसी घटनाओं ने समूह के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं।
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18 अगस्त की बैठक पर टिकी नजरें
अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि 18 अगस्त 2026 की बैठक से पहले चंद्रशेखरन क्या फैसला लेते हैं। अगर वह पद छोड़ते हैं तो Tata Sons में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वहीं, अगर वह निदेशक के रूप में दोबारा चुने जाते हैं तो उनके आगे चेयरमैन के रूप में बने रहने का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। अब सभी की नजरें Tata Sons की 18 अगस्त की बैठक और उससे पहले आने वाले किसी भी ताजा घटनाक्रम पर हैं।
