India Fuel Crisis: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश की सरकारी तेल कंपनियां (OMC) आम लोगों को राहत देने के लिए भारी नुकसान उठा रही हैं। सरकार का कहना है कि पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बढ़ोतरी का पूरा बोझ जनता पर नहीं डाला जा रहा।
पश्चिम एशिया संकट के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि सरकारी तेल कंपनियां रोज करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान उठाकर पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों का बोझ आम जनता पर नहीं डाल रहीं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) फिलहाल पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बिक्री पर हर दिन लगभग 550 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। इसका मकसद आम लोगों को महंगे ईंधन की मार से बचाना है। सरकार ने कहा कि यह राहत खासतौर पर घरों में गैस इस्तेमाल करने वाले परिवारों, पेट्रोल पर निर्भर दोपहिया वाहन चालकों और खेती-किसानी में ईंधन इस्तेमाल करने वाले किसानों के लिए दी जा रही है।
रिटेल और इंडस्ट्रियल खरीदारों के लिए अलग नियम
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि रिटेल ग्राहकों और औद्योगिक ईंधन खरीदने वालों के लिए अलग व्यवस्था लागू है। पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले ईंधन की कीमतों को आम लोगों को राहत देने के लिए नियंत्रित रखा गया है, जबकि उद्योगों को मिलने वाले ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से तय होती हैं।
सरकार के मुताबिक, कुछ औद्योगिक उपभोक्ता कम कीमत का फायदा उठाने के लिए इंडस्ट्रियल सप्लाई चैनल छोड़कर पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने लगे हैं। इससे कई जगहों पर पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ रहा है और स्थानीय स्तर पर कमी जैसी स्थिति बन सकती है, जबकि देश में कुल सप्लाई पर्याप्त है।
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निजी कंपनियों की बिक्री में गिरावट
सरकार ने बताया कि निजी तेल कंपनियों की डीजल बिक्री में इस महीने बड़ी गिरावट देखी गई है। मंत्रालय के अनुसार, निजी तेल कंपनियों के यहां डीजल की बिक्री करीब 38 प्रतिशत तक घट गई है। इसकी वजह सरकारी पेट्रोल पंपों पर अपेक्षाकृत कम कीमतें बताई जा रही हैं। वहीं, सरकारी तेल कंपनियों के बल्क ग्राहकों की संख्या में भी करीब 29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है क्योंकि कई खरीदार सीधे रिटेल पंपों की तरफ रुख कर रहे हैं।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती
स्थिति को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार ने उद्योग संगठनों से संपर्क किया है और ईंधन के गलत इस्तेमाल व डायवर्जन को रोकने में सहयोग मांगा है। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष निगरानी टीम (Special Squads) बनाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कालाबाजारी, अवैध भंडारण और ईंधन की गलत सप्लाई पर रोक लगाई जा सके। सरकार ने कहा कि जरूरत पड़ने पर Essential Commodities Act के तहत कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है।
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भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं
सरकार ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर देश है, जहां 22 रिफाइनरियां काम कर रही हैं और कुल क्षमता 258.1 मिलियन टन प्रति वर्ष है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में ईंधन की खपत 243.2 मिलियन टन रही, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 61.5 मिलियन टन तक पहुंचा।
