PC price increase: टेक बाजार में एक नया ट्रेंड तेजी से उभर रहा है। दुनिया भर में Artificial Intelligence की बढ़ती मांग ने मेमोरी चिप की सप्लाई पर दबाव बढ़ा दिया है। जिसका सीधा असर अब लैपटॉप और डेस्कटॉप की कीमतों पर पड़ रहा है। PC बनाने वाली कंपनी Lenovo का कहना है कि कंप्यूटर की कीमतों में बढ़ोतरी का दौर जारी रह सकता है, क्योंकि मेमोरी चिप की कमी अभी खत्म होती नहीं दिख रही। तो आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह।
दिन-प्रतिदिन टेक बाजार में मेमोरी संकट गहराता जा रहा है और विशेषज्ञ 2026 तक कीमतें ऊंची रहने की आशंका जता रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें।
उत्पादन बढ़ने से कंपनियों पर दबाव
कंप्यूटर बनाने वाली कंपनियों को RAM और स्टोरेज जैसे जरूरी कंपोनेंट महंगे मिल रहे हैं। सप्लाई अनिश्चित होने से उत्पादन की योजना बनाना कठिन हो गया है। कंपनी को इन समस्याओं से निपटने के लिए कोई दूसरा किफायती विकल्प भी नहीं दिखाई दे रहा है। लागत बढ़ने का सीधा असर फाइनल कीमत पर पड़ रहा है।
चिप उद्योग से भी मिले चेतावनी
मेमोरी की कमी को लेकर केवल पीसी निर्माता ही नहीं, बल्कि Semiconductor उद्योग भी चिंतित है। हालही में Intel के नेतृत्व की ओर से भी यह कहा गया है कि यह समस्या जल्दी खत्म होने वाली नहीं है। आनेवाले दिनों में इसका असर हार्डवेयर की कीमतें लंबे समय तक महंगी रह सकती हैं।
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महंगाई के डर से बढ़ी खरीदारी
हलांकि, पीसी के बिक्री बढ़ी है। कारण यह बताए जा रहे हैं कि संभावित कीमत बढ़ने की खबरों के बीच कई ग्राहकों ने पहले ही नए कंप्यूटर खरीदने शुरू कर दिए। वहीं कंपनियों का मानना है कि यह स्थायी मांग नहीं है। यह तो महंगाई के डर से हुई अस्थायी खरीदारी है। जिससे लोकल स्तर पर भी दामों इजाफा हुई है।
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AI सर्वर बने मेमोरी चिप के बड़े ग्राहक
मेमोरी चिप की कमी का एक बड़ा कारण यह है कि निर्माता अब अधिक आपूर्ति एआई सर्वर और डेटा सेंटर को दे रहे हैं। इन क्षेत्रों में मांग तेजी से बढ़ रही है। मुनाफा भी अधिक है, जिससे लैपटॉप और डेस्कटॉप के लिए उपलब्ध चिप कम पड़ रही है। Nvidia ने तो गेमिंग के लिए चिप बनाने के बदले एआई आधारित मेमोरी चिप पर जोड़ देना शुरू कर दिया है।
स्टॉक बढ़ाकर कंपनियां कर रहीं बचाव
कई कंपनियों ने जरूरी कंपोनेंट का अतिरिक्त स्टॉक जमा करना शुरू किया है। इससे उत्पादन फिलहाल जारी रखा जा सकता है। लेकिन यदि सप्लाई की समस्या लंबी चली तो यह समाधान ज्यादा समय तक कारगर नहीं रहेगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि Memory से जुड़ी चुनौतियां 2026 तक जारी रह सकती हैं। इसका मतलब है कि बाजार में भारी छूट और सस्ते सौदे मिलने की गुंजाइश कम दिखाई दे रही है।
कुल मिलकार एआई के आने के बाद स्थिति ऐसी बन गई है कि पहले जहां आम उपभोक्ता बाजार केंद्र में था, अब डेटा सेंटर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर बड़ी प्राथमिकता बनते जा रहे हैं। जिसका प्रभाव नया कंप्यूटर खरीदने की सोचनेवालों पर पड़ रहा है।
