विटालिक ब्यूटिरिन का दावा: एल्गोरिदमिक स्टेबलकॉइन हैं असली DeFi की पहचान

8 mins read
16 views
February 9, 2026

Vitalik Buterin: Ethereum के सह संस्थापक विटालिक बुटेरिन ने साफ कहा है कि एल्गोरिदमिक स्टेबलकॉइन विकेंद्रीकृत वित्त यानी DeFi का एक जरूरी हिस्सा हैं। उन्होंने उन आलोचनाओं का जवाब दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि DeFi का इस्तेमाल तभी मायने रखता है जब कोई पहले से ही क्रिप्टो में निवेशित हो।

विटालिक ब्यूटिरिन ने एल्गोरिदमिक स्टेबलकॉइन को DeFi का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि सही डिजाइन वाले ETH-बैक्ड मॉडल यूजर्स के लिए रिस्क कम कर सकते हैं और केंद्रीकृत सिस्टम पर निर्भरता घटाते हैं।

X पर एक यूजर ने लिखा कि DeFi का कोई खास मतलब नहीं है, जब तक आप क्रिप्टो में लॉन्ग पोजिशन न रखते हों और सेल्फ कस्टडी के साथ फाइनेंशियल सर्विसेज न चाहते हों। ब्यूटिरिन ने इस बात से सहमति जताई। उनका कहना था कि यही सोच DeFi की शुरुआत की असली वजह थी।

ETH से समर्थित एल्गोरिदमिक स्टेबलकॉइन क्यों अहम हैं

ब्यूटिरिन ने खास तौर पर ETH से समर्थित एल्गोरिदमिक स्टेबलकॉइन का समर्थन किया। ये सिस्टम आम तौर पर Collateralized Debt Positions पर काम करते हैं, जहां यूजर अपनी क्रिप्टो एसेट गिरवी रखकर स्टेबलकॉइन बनाते हैं।

उन्होंने समझाया कि भले ही ज्यादातर लिक्विडिटी ऐसे लोगों से आए जो एक तरफ ‘नेगेटिव एल्गो डॉलर’ रखते हों और दूसरी तरफ कहीं और ‘पॉजिटिव डॉलर”, फिर भी यह सिस्टम फायदेमंद है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि यूजर डॉलर से जुड़े प्रतिपक्ष जोखिम को खुद उठाने के बजाय मार्केट मेकर पर शिफ्ट कर सकते हैं।

RWA-बैक्ड स्टेबलकॉइन

ब्यूटिरिन ने यह भी माना कि Real-World Assets से समर्थित स्टेबलकॉइन भी उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने साफ किया कि इनके लिए दो शर्तें ओवरकोलैटरलाइजेशन और डाइवर्सिफिकेशन बहुत जरूरी हैं। अगर ऐसा होता है, तो रिस्क कम होने के बजाय बढ़ सकता है और DeFi का मकसद कमजोर पड़ जाता है।

READ MORE: क्या है क्रिप्टो गिरावट की असली वजह? एक्सपर्ट से जानें

डेवलपर्स को किस दिशा में काम करना चाहिए

ब्यूटिरिन के अनुसार, सबसे पहले ETH-कोलैटरलाइज्ड स्टेबलकॉइन पर ध्यान देना चाहिए। अगर यह संभव न हो, तो बहुत ज्यादा डाइवर्सिफाइड RWA-बैक्ड मॉडल बनाए जा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में DeFi को अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता भी कम करनी चाहिए।

‘USDC से यील्ड’ को DeFi नहीं मानते ब्यूटिरिन

ब्यूटिरिन ने यह भी साफ कर दिया कि USDC जैसे केंद्रीकृत स्टेबलकॉइन को DeFi प्रोटोकॉल में डालकर यील्ड कमाना असली DeFi नहीं है। उनके मुताबिक, ऐसे सिस्टम में वही भरोसे से जुड़े जोखिम मौजूद रहते हैं जो पारंपरिक बैंकों या फाइनेंशियल सिस्टम में होते हैं। सिर्फ स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट इस्तेमाल कर लेना किसी सिस्टम को सच में विकेंद्रीकृत नहीं बनाता, अगर उसकी नींव अब भी केंद्रीकृत संस्थाओं पर टिकी हो।

READ MORE: ट्रंप ने 500 मिलियन डॉलर क्रिप्टो डील से बनाई दूरी

DeFi के भविष्य का असली मकसद

ब्यूटिरिन की बातों से साफ है कि उनके लिए DeFi का असली मकसद ज्यादा यील्ड देना या आम लोगों को डॉलर कमाने का आसान तरीका देना नहीं है। असली लक्ष्य ऐसे सिस्टम बनाना है जो भरोसे की जरूरत कम करें, रिस्क को बेहतर तरीके से बांटें और केंद्रीकृत कंपनियों पर निर्भर न हों।

Ragini Sinha

5 साल के अनुभव के साथ मैंने मीडिया जगत में कंटेट राइटर, सीनियर कंटेंट राइटर, मीडिया एनालिस्ट और प्रोग्राम प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया है। बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव को मैंने कवर किया है। अपने काम को लेकर मुझे पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। काम को जल्दी सीखने की कला मुझे औरों से अलग बनाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Previous Story

टेक दुनिया में नया धमाका! OpenAI ला सकती है AI-पावर्ड ईयरबड्स

Next Story

क्वालकॉम टीम ने पूरा किया 2nm चिप टेप-आउट

Latest from Cryptocurrency

CFTC ने राजनीतिक प्रेडिक्शन मार्केट्स पर हटाई रोक

CFTC ने राजनीतिक प्रेडिक्शन मार्केट्स पर हटाई रोक

Political Prediction Markets: अमेरिका के कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन ने प्रेडिक्शन मार्केट्स यानी भविष्य की घटनाओं पर आधारित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स को लेकर बड़ा फैसला

Don't Miss