Meta Messenger Update: डिजिटल दुनिया में कई बार कोई प्लेटफॉर्म धीरे-धीरे सिमटता है और यूजर्स को इसका एहसास भी नहीं होता। Meta ने कुछ ऐसा ही कदम उठाते हुए Messenger की स्टैंडअलोन वेबसाइट messenger.com को बंद करने का फैसला किया है। अप्रैल से यह वेबसाइट उपलब्ध नहीं होगी। डेस्कटॉप यूजर्स को सीधे Facebook के मैसेज सेक्शन पर भेज दिया जाएगा। तो आइए जानते हैं इसके प्रभाव के बारे में।
messenger.com अप्रैल से होगा बंद! Meta ने यूजर्स को Facebook Messages पर शिफ्ट करने की घोषणा की। क्या बदलेगा आपके लिए?
अब मैसेजिंग सिर्फ Facebook के दायरे में
वेब ब्राउज़र पर मैसेजिंग खत्म नहीं होगी, लेकिन उसका पता बदल जाएगा। messenger.com की जगह अब यूजर्स को Facebook के facebook.com, messages पेज पर रीडायरेक्ट किया जाएगा।Messenger एक अलग वेब पहचान के बजाय Facebook का हिस्सा बनकर रह जाएगा। मोबाइल पर Messenger ऐप पहले की तरह चलता रहेगा।
बैकअप और PIN की प्रक्रिया
जो लोग ऐप या नए इंटरफेस पर शिफ्ट करेंगे। वे अपना पुराना चैट इतिहास PIN के जरिए दोबारा हासिल कर सकेंगे। यह वही PIN है जो End-to-End Encryption बैकअप बनाते समय सेट किया गया था। अगर किसी को कोड याद नहीं है, तो उसे रीसेट करने का विकल्प भी दिया जाएगा।
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Messenger की बदलती पहचान
Messenger की शुरूआत 2008 में Facebook Chat के हुआ था। 2011 में इसे अलग ऐप बना। 2014 में इसे हटाकर को Messenger पर भेजा गया। 2023 के बाद से Meta ने दोनों प्लेटफॉर्म्स को फिर से जोड़ने का प्रयास किया। अब वेबसाइट के बंद होने के साथ क्लियर हो गया है कि Messenger को दोबारा Facebook के साथ पूरी तरह समाहित किया जा रहा है।
क्यों नाराज़ हैं कुछ यूजर्स?
कई यूजर्स के लिए Messenger वेबसाइट एक सुविधाजनक विकल्प थी, खासकर उनके लिए जिन्होंने अपना Facebook अकाउंट डिएक्टिवेट कर रखा था। लेकिन मैसेजिंग जारी रखी थी। अब इस बदलाव के बाद उन्हें दोबारा Facebook में लौटना पड़ सकता है। टेक मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस फैसले को लेकर असंतोष देखा जा रहा है।
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संकेत पहले ही मिल चुके थे
यह सबकुछ अचानक नहीं हो गया है। कुछ महीने पहले Meta ने Messenger के स्टैंडअलोन डेस्कटॉप ऐप्स को भी बंद कर दिया था। उस समय कंपनी ने यूजर्स को Facebook पर मैसेजिंग जारी रखने की सलाह दी थी। अब वेबसाइट का बंद होना उसी प्रक्रिया की अगली कड़ी माना जा रहा है।
यानी अब Messenger अलग बनी पहचान धीरे-धीरे खत्म होती दिख रही है। Meta का फोकस अब अलग-अलग प्लेटफॉर्म की बजाय एक ही जगह से सब कुछ संचालित होने की बढ़ रही है।
