PM-DHARA Scheme : सरकार ने पावर ट्रांसमिशन और रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 1.86 लाख करोड़ की बड़ी स्कीम को मंजूरी दी है। इसके बावजूद गुरुवार के कारोबार में पावर सेक्टर के कई प्रमुख शेयरों में गिरावट देखने को मिली। Tata Power, Adani Power, NTPC और Power Grid समेत कई स्टॉक्स दबाव में रहे। यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड से जोड़ने और ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा निवेश घोषित किया है।
PM-DHARA स्कीम में 1,86,405 करोड़ का निवेश, जानिए 50 GWh बैटरी स्टोरेज, 135 GW क्षमता और पावर स्टॉक्स पर क्या असर है।
पावर स्टॉक्स में कैसी रही हलचल?
गुरुवार की शुरुआती ट्रेडिंग में Tata Power का शेयर करीब 1.7% गिरकर 353.95 पर आ गया। Torrent Power में भी करीब 1.7% की गिरावट रही और शेयर 1,224 के आसपास कारोबार करता दिखा। Adani Power करीब 1.6% गिरकर 200.55 पर आ गया। Power Grid के शेयर में करीब 1.4% की गिरावट रही और यह 256.85 के आसपास कारोबार कर रहा था। NTPC में भी करीब 1.1% की कमजोरी देखने को मिली और शेयर 318.25 के स्तर पर आ गया। इसके अलावा JSW Energy करीब 0.8% और Suzlon Energy करीब 0.7% नीचे कारोबार कर रहे थे। Vedanta Power में भी करीब 1.3% की गिरावट दर्ज की गई।
क्या है 1.86 लाख करोड़ की PM-DHARA स्कीम?
केंद्र सरकार ने 30 सितंबर को PM-DHARA यानी PM-Developing Harmonized and Accelerated Renewable-energy Access Scheme को मंजूरी दी। इसका मकसद राज्यों के इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करना और रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड से बेहतर तरीके से जोड़ना है। इस स्कीम का कुल प्रोजेक्ट आउटले 1,86,405 करोड़ है। इसमें 1,36,378 करोड़ इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम के विकास के लिए और 50,000 करोड़ 50 GWh Battery Energy Storage System यानी BESS के लिए रखे गए हैं। स्कीम में 54,082 करोड़ की सेंट्रल फाइनेंशियल सपोर्ट भी शामिल है। सरकार के अनुसार, इससे 135 GW तक की रिन्यूएबल एनर्जी पावर इवैक्युएशन क्षमता को सपोर्ट करने में मदद मिलेगी। इसे FY 2032-33 तक तैयार करने का लक्ष्य है।
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50 GWh बैटरी स्टोरेज पर भी जोर
स्कीम में 50 GWh बैटरी स्टोरेज क्षमता के लिए 50,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। सोलर और विंड पावर का उत्पादन मौसम और समय पर निर्भर करता है। ऐसे में ज्यादा बिजली बनने के समय उसे बैटरी में स्टोर किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार के मुताबिक, BESS ग्रिड में फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने, ट्रांसमिशन कंजेशन कम करने, पीक ऑवर में बिजली की कटौती घटाने और नॉन-सोलर ऑवर की मांग पूरी करने में मदद कर सकता है।
पावर कंपनियों के लिए क्या मतलब?
इस स्कीम से आने वाले वर्षों में ट्रांसमिशन लाइन्स, ट्रांसफॉर्मर्स, सबस्टेशंस और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम से जुड़े कारोबार में प्रोजेक्ट और डिमांड बढ़ सकती है। हालांकि, इसका असर हर कंपनी पर एक जैसा नहीं होगा। किसी कंपनी के शेयर पर प्रभाव उसके बिजनेस एक्सपोजर, ऑर्डर बुक, प्रोजेक्ट पूरा करने की क्षमता और कमाई पर निर्भर करेगा। सरकारी स्कीम की घोषणा का असर तुरंत शेयर की कीमत में दिखना जरूरी नहीं है। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में प्लानिंग, टेंडर, प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन और पूंजी लगाने जैसी कई प्रक्रियाओं में समय लगता है।
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बढ़ती बिजली मांग पर भी सरकार का फोकस
दूसरी तरफ, बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने 112 कैप्टिव कोयला आधारित पावर प्लांट्स को 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक अपनी उपलब्ध अधिकतम क्षमता पर चलाने का निर्देश दिया है। ये प्लांट 50 MW या उससे ज्यादा क्षमता वाले हैं और आदेश के तहत अतिरिक्त बिजली को पावर एक्सचेंज के जरिए बेचने का भी प्रावधान है। इस तरह पावर सेक्टर में एक तरफ रिन्यूएबल एनर्जी के लिए ट्रांसमिशन और बैटरी स्टोरेज पर बड़ा निवेश किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए थर्मल पावर की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर है। इससे आने वाले समय में जनरेशन, ट्रांसमिशन और एनर्जी स्टोरेज से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में गतिविधियां बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
