OpenAI ChatGPT: आने वाले समय में ChatGPT इस्तेमाल करने का तरीका और उसकी कीमतें बदल सकती हैं। OpenAI अब इस पर विचार कर रही है कि मौजूदा ‘अनलिमिटेड सब्सक्रिप्शन’ मॉडल लंबे समय तक चल पाना मुश्किल है।
कंपनी के अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे AI ज्यादा पावरफुल और ज्यादा लोगों के इस्तेमाल में आ रहा है, वैसे-वैसे इसका खर्च भी बढ़ रहा है। ऐसे में अब एक नया तरीका अपनाया जा सकता है, जिसमें यूजर्स से उनकी इस्तेमाल के हिसाब से पैसे लिए जाएं, न कि हर महीने एक फिक्स फीस।
यह बदलाव उसी तरह हो सकता है जैसे हम बिजली या पानी के लिए बिल देते हैं यानी जितना इस्तेमाल, उतना भुगतान। हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि ChatGPT का फ्री वर्जन किसी न किसी रूप में बना रहेगा।
ChatGPT के अनलिमिटेड प्लान खत्म हो सकते हैं, OpenAI अब यूसेज बेस्ड प्राइसिंग मॉडल लाने की तैयारी में है।
अनलिमिटेड प्लान क्यों हो सकते हैं खत्म?
ChatGPT के हेड निक टर्ली ने हाल ही में कहा कि अनलिमिटेड AI एक्सेस देना भविष्य में संभव नहीं होगा। उन्होंने इसे ‘फ्री अनलिमिटेड बिजली’ देने जैसा बताया, जो लंबे समय तक टिक नहीं सकता। वहीं, सैम ऑल्टमैन ने भी पहले कहा था कि AI को एक ‘यूटिलिटी सर्विस’ की तरह देखा जा सकता है, जहां यूजर्स अपने इस्तेमाल के हिसाब से भुगतान करेंगे। इससे कीमत ज्यादा फेयर और फ्लेक्सिबल हो सकती है।
अभी कौन-कौन से प्लान हैं?
- एक फ्री वर्जन, जिसमें कुछ लिमिट्स होती हैं।
- Plus प्लान, जिसकी कीमत करीब 1,999 प्रति माह है।
- Pro प्लान, जिसकी कीमत करीब 19,900 प्रति माह है और इसमें ज्यादा पावर मिलती है।
- भारत में एक सस्ता ChatGPT Go प्लान भी है, जो 399 प्रति माह से शुरू होता है
2024 के बाद से इन प्लान्स की कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। अब AI तेजी से आगे बढ़ रहा है, इसलिए कंपनी को लगता है कि यह मॉडल ज्यादा समय तक नहीं चलेगा।
नए AI मॉडल और फ्री यूजर्स को फायदा
कीमतों में बदलाव की चर्चा के बीच OpenAI अपने नए AI मॉडल भी ला रही है। हाल ही में कंपनी ने GPT-5.4 Mini और GPT-5.4 Nano लॉन्च किए हैं। इनमें से GPT-5.4 Mini को फ्री और Go प्लान वाले यूजर्स के लिए भी उपलब्ध किया गया है। इसका मतलब है कि बिना ज्यादा पैसे दिए भी यूजर्स को बेहतर अनुभव मिल रहा है। यह दिखाता है कि कंपनी अभी एक्सेस आसान रख रही है, लेकिन भविष्य में कमाई के नए तरीके ढूंढ रही है।
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बाकी कंपनियां भी बदल रही हैं तरीका
OpenAI अकेली नहीं है जो ऐसा सोच रही है। दूसरी टेक कंपनियां भी नए प्राइसिंग मॉडल पर काम कर रही हैं। Microsoft ने संकेत दिया है कि वह कंपनियों से हर यूजर के बजाय हर AI एजेंट के हिसाब से पैसे ले सकती है। वहीं, Anthropic पहले से ही ‘pay-as-you-use’ मॉडल पर काम कर रही है, जहां टोकन के हिसाब से चार्ज लिया जाता है।
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आगे क्या बदल सकता है?
जैसे-जैसे AI हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहा है, वैसे-वैसे इसकी कीमतें भी बदलेंगी। आने वाले समय में यह तय हो सकता है कि हम AI का इस्तेमाल कैसे करते हैं और उसके लिए कितना भुगतान करते हैं। कुल मिलाकर, भविष्य में AI का इस्तेमाल ज्यादा फ्लेक्सिबल होगा, लेकिन ‘जितना इस्तेमाल, उतना भुगतान’ वाला सिस्टम ज्यादा आम हो सकता है।
