Meta Compute: AI की रेस में अब Meta ने एक और बड़ा तकनीकी चाल चल दिया है। कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग ने Meta Compute नाम की नई पहल की घोषणा की घोषणा की है। जिससे आने वाले वर्षों में Meta सिर्फ सॉफ्टवेयर ही नहीं, AI इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी सुपरपावर बनने की ओर बढ़ सकता है। इसके लिए भारी-भरकम निवेश करने करने की योजना है।
AI की रेस में Meta ने चला जबरदस्त मास्टरस्ट्रोक। Meta Compute पहल से डेटा सेंटर और सुपरइंटेलिजेंस को मिलेगी नई रफ्तार। जानिए कितने अरब डॉलर खर्च करने का है प्लान?
डेटा सेंटर नहीं, भविष्य की नींव
Meta Compute को सिर्फ नए डेटा सेंटर्स की योजना मानना गलत होगा। यह दरअसल उस भविष्य की नींव है। जिसमें AI मॉडल्स को ट्रेन करने और चलाने के लिए अभूतपूर्व स्तर की कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होगी। Mark Zuckerberg के अनुसार, Meta इस दशक में ही दसियों गीगावॉट की क्षमता खड़ी करने जा रही है। ये आगे चलकर सैकड़ों गीगावॉट तक भी पहुंच सकती है।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर बनेगा Meta की सबसे बड़ी ताकत
मार्क जुकरबर्ग का यह भी कहना है कि आने वाले समय में सिर्फ बेहतरीन AI मॉडल होना ही काफी नहीं होगा, बल्कि यह भी अहम होगा कि उन्हें चलाने के लिए कितनी मजबूत और स्केलेबल कंप्यूटिंग व्यवस्था मौजूद है। उनके इसी सोच के बाद से Meta Compute को एक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इससे साफ है कि जुकरवर्ग की कंपनी को प्रतिस्पर्धियों से आगे रख सकता है।
नई टीम, नई योजाना और रणनीति
इस मेगा प्रोजेक्ट की कमान Meta के हेड ऑफ ग्लोबल इंजीनियरिंग Santosh Janardhan संभालेंगे। वहीं Safe Superintelligence के पूर्व CEO Daniel Gross एक विशेष टीम का नेतृत्व करेंगे, जो लंबी अवधि की क्षमता योजना, सप्लायर नेटवर्क, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और बिजनेस मॉडल पर फोकस करेगी। इससे साफ है कि Meta इसे सिर्फ टेक नहीं, बल्कि बिजनेस और पॉलिसी के नजरिए से भी देख रही है।
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सरकारों से साझेदारी की अहम भूमिका
Meta Compute में Dina Powell McCormick मैककॉर्मिक की भूमिका भी बेहद अहम होगी। President और Vice Chairman के तौर पर वह सरकारों और संप्रभु संस्थानों के साथ तालमेल बिठाने पर काम करेंगी। मकसद है. Meta के विशाल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन, निवेश, फंडिंग और रेगुलेटरी सपोर्ट को आसान बनाना।
AI ‘सुपरइंटेलिजेंस’ की ओर बड़ा कदम
Meta पहले ही अपनी AI Superintelligence रणनीति को लेकर आक्रामक रुख अपना चुकी है। इसी कड़ी में कंपनी ने हाल ही में डेटा सेंटर्स को बिजली देने के लिए न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़ी कई बड़ी डील्स भी की हैं। इससे संकेत मिलता है कि Meta लंबे समय तक चलने वाली, स्थिर और शक्तिशाली ऊर्जा व्यवस्था पर दांव लगा रही है।
Meta 600 अरब डॉलर का करेगा निवेश
जुकरबर्ग पहले ही इशारा कर चुके हैं कि Meta 2028 तक AI इन्फ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट पर लगभग 600 अरब डॉलर खर्च कर सकती है। Meta Compute इसी विशाल निवेश का केंद्रबिंदु है, जो तय करेगा कि आने वाले दशक में AI की दुनिया में कौन लीड करेगा।
संकेत साफ है कि Meta की Meta Compute के जरिए AI का भविष्य अब एल्गोरिद्म से आगे निकलकर इन्फ्रास्ट्रक्चर की जंग बन चुका है। और इसमें Meta पूरी ताकत के साथ उतरने को तैयार दिख रही है।
