Delhi High Court: सोशल मीडिया कंपनी Meta Platforms Inc इस समय एक बड़े कानूनी विवाद में घिरी हुई है। कंपनी ने Delhi HC में याचिका दाखिल कर Central Consumer Protection Authority के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसपर 10 लाख का जुर्माना लगाया गया था। यह मामला फेसबुक मार्केटप्लेस पर बिना अनुमति वॉकी-टॉकी की लिस्टिंग और बिक्री से जुड़ा है।
फेसबुक मार्केटप्लेस पर वॉकी-टॉकी लिस्टिंग को लेकर Meta Platforms Inc पर 10 लाख जुर्माना लगा, जिसे कंपनी ने Delhi HC में चुनौती दी है।
Meta की सफाई
Meta की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में साफ कहा कि फेसबुक कोई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म नहीं है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक ‘नोटिस बोर्ड’ की तरह काम करता है, जहां लोग अपनी चीजें बेचने के लिए पोस्ट डालते हैं। उन्होंने आसान उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपना फोन बेचना चाहता है, तो वह फेसबुक पर पोस्ट करेगा और खरीदने वाला उससे सीधे संपर्क करेगा। फेसबुक बीच में न कोई पेमेंट लेता है, न कोई कमीशन और न ही खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया को कंट्रोल करता है।
कोर्ट ने उठाए अहम सवाल
इस मामले की सुनवाई कर रहे जज जस्टिस पुरुषइंद्र कुमार कौरव ने Meta से पूछा कि आखिर CCPA के आदेश को ‘अधिकार क्षेत्र से बाहर’ कैसे कहा जा सकता है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि इस मामले को National Consumer Disputes Redressal Commission में क्यों नहीं ले जाया गया। अब इस केस की अगली सुनवाई 25 मार्च को तय की गई है, जहां Meta को अपने तर्क और स्पष्ट करने होंगे।
CCPA का आरोप क्या है?
1 जनवरी को CCPA ने अपने आदेश में कहा था कि Meta ने Consumer Protection Act और IT नियमों का उल्लंघन किया है। आरोप यह था कि फेसबुक मार्केटप्लेस पर वॉकी-टॉकी जैसे प्रोडक्ट बिना जरूरी जानकारी और सरकारी मंजूरी के बेचे जा रहे थे।
CCPA ने Meta को यह भी निर्देश दिया
- ऐसे प्रोडक्ट की लिस्टिंग रोकी जाए जिन्हें सरकारी अनुमति चाहिए।
- प्लेटफॉर्म पर होने वाली गलत लिस्टिंग की नियमित जांच की जाए।
- इस जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
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Meta का तर्क
Meta ने अपनी याचिका में कहा कि फेसबुक मार्केटप्लेस एक फ्री सर्विस है, जो सिर्फ आम लोगों के लिए है। यहां बिजनेस या बड़े व्यापारी को लिस्टिंग की अनुमति नहीं है। कंपनी का यह भी कहना है कि CCPA ने नियमों को गलत तरीके से लागू किया है।
अगर हर डिजिटल प्लेटफॉर्म को ई-कॉमर्स मान लिया जाएगा, तो ऑनलाइन न्यूज साइट्स और कम्युनिटी प्लेटफॉर्म्स भी इसके दायरे में आ जाएंगे, जहां लोग रोजमर्रा की चीजें जैसे जूते, खिलौने या पानी की बोतल तक पोस्ट करते हैं। इससे आम लोगों पर बेवजह नियमों का बोझ बढ़ सकता है।
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पहले भी कई कंपनियों पर कार्रवाई
इस मामले में CCPA ने खुद संज्ञान लेते हुए जांच की थी। इसमें पता चला कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर 16,970 से ज्यादा गलत तरीके से वॉकी-टॉकी लिस्ट किए गए थे। इसके बाद Amazon, Flipkart, Meesho, JioMart और Meta समेत 13 कंपनियों को नोटिस भेजा गया।
