Telegram vs WhatsApp: WhatsApp की सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर एक बड़ी बहस शुरू हो गई है। WhatsApp पर पावेल दुरोव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने 12 अप्रैल की एक पोस्ट में कहा कि WhatsApp की end-to-end encryption को लेकर यूजर्स को पूरी जानकारी नहीं दी जाती। उन्होंने इसे ‘इतिहास की सबसे बड़ी कंज्यूमर फ्रॉड’ तक कहा।
WhatsApp और Telegram की प्राइवेसी को लेकर चर्चा तेज, जानें क्या है एन्क्रिप्शन और डेटा बैकअप से जुड़ा पूरा विवाद।
क्लाउड बैकअप को लेकर बड़ा दावा
दुरोव का कहना है कि WhatsApp पर भेजे गए करीब 95% निजी मैसेज अंत में Apple iCloud और Google Drive पर प्लेन टेक्स्ट बैकअप के रूप में सेव हो जाते हैं। इसका मतलब है कि मैसेज भेजते समय तो सुरक्षित रहते हैं, लेकिन बैकअप के समय वही डेटा पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहता।
WhatsApp’s “E2E encryption by default” claim is a giant consumer fraud: ~95% of private messages on WhatsApp end up in plain-text backups on Apple/Google servers — not E2E-encrypted. Backup encryption is optional, and few people enable it — let alone use strong passwords.
— Pavel Durov (@durov) April 12, 2026
बैकअप एन्क्रिप्शन हर किसी के लिए ऑन नहीं
WhatsApp में बैकअप एन्क्रिप्शन का फीचर मौजूद है, लेकिन यह अपने आप चालू नहीं होता। यूजर को इसे खुद ऑन करना पड़ता है और एक मजबूत पासवर्ड या की सेट करनी होती है। दुरोव का कहना है कि ज्यादातर लोग यह सेटिंग चालू ही नहीं करते। अगर एक व्यक्ति भी एन्क्रिप्शन ऑन नहीं करता, तो उसकी चैट का कॉपी Cloud में अनसेक्योर रह सकता है।
The claims in this lawsuit are categorically false and absurd. WhatsApp has been end-to-end encrypted using the Signal protocol for a decade so your messages cannot be read by anyone other than the sender and recipient.
— WhatsApp (@WhatsApp) April 9, 2026
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सुरक्षा को लेकर पहले से चिंता
Electronic Frontier Foundation जैसी संस्थाओं ने पहले भी कहा है कि अनएन्क्रिप्टेड बैकअप खतरे में हो सकते हैं। इन्हें सरकारी रिक्वेस्ट, हैकिंग या कंपनी के अंदरूनी एक्सेस से देखा जा सकता है। इस मुद्दे पर अमेरिका में एक क्लास-एक्शन केस भी चल रहा है, जिसमें WhatsApp पर ‘backdoor access’ का आरोप है। हालांकि, कंपनी की पैरेंट कंपनी Meta ने इन सभी आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताया है।
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Telegram बनाम WhatsApp बहस
दुरोव ने Telegram को ज्यादा सुरक्षित बताया है और कहा कि 12 साल में Telegram ने कभी यूजर्स का डेटा शेयर नहीं किया, लेकिन एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि Telegram में हर चैट में डिफॉल्ट रूप से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन ऑन नहीं होता।
