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AI का बढ़ता खतरा: क्या समय पर सिस्टम अपडेट कर पाएंगी कंपनियां?

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October 22, 2026

AI Cyber Attack : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सॉफ्टवेयर में मौजूद सुरक्षा खामियों का पता लगाना आसान हो गया है। इससे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इन खामियों को ठीक कर सकते हैं। लेकिन साइबर अपराधी भी इसी तकनीक का इस्तेमाल करके सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं। ऐसे में कंपनियों के लिए अपने सॉफ्टवेयर को समय पर अपडेट करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। मीडिया रिपोर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अपडेट में देरी होने पर हैकर्स को हमला करने का मौका मिल सकता है।

AI से साइबर हमलों का खतरा बढ़ा, जानें कैसे समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट करके कंपनियां हैकर्स से अपने सिस्टम को सुरक्षित रख सकती हैं।

कई यूरोपीय देशों की सरकारी वेबसाइटें हुईं बंद

यह मामला तब चर्चा में आया, जब जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, बेल्जियम और डेनमार्क की कई सरकारी वेबसाइटें दो गंभीर सुरक्षा खामियों का पता चलने के बाद बंद हो गईं। ये खामियां PHP में मिली थीं। PHP एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है, जिसका इस्तेमाल बड़ी संख्या में वेबसाइटों को चलाने के लिए किया जाता है। PHP के डेवलपर्स ने इन खामियों को ठीक करने के लिए अपडेट जारी किए और यूजर्स से उन्हें तुरंत इंस्टॉल करने को कहा। लेकिन केवल अपडेट जारी करना काफी नहीं है। जब तक कंपनियां अपने सिस्टम में अपडेट नहीं लगातीं, तब तक उन पर साइबर हमले का खतरा बना रह सकता है। Acronis में भारत और एशिया के जनरल मैनेजर राजेश छाबड़ा और Mitigata के CEO और सह-संस्थापक मोहित आनंद ने बताया कि AI के कारण साइबर हमलों की रफ्तार बढ़ रही है। इसलिए समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट करना और सुरक्षा के जरूरी उपाय अपनाना अहम है।

AI की मदद से हैकर्स कैसे करते हैं हमला?

AI की मदद से सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को समझना और उनका फायदा उठाने के तरीके खोजना आसान हो सकता है। सुरक्षा विशेषज्ञ इस तकनीक से खामियों का पता लगाकर उन्हें ठीक करते हैं। वहीं, हैकर्स इसका इस्तेमाल उन सिस्टम पर हमला करने के लिए कर सकते हैं, जिनमें सुरक्षा अपडेट नहीं लगाए गए हैं। राजेश छाबड़ा के मुताबिक, जब डेवलपर्स किसी खामी को ठीक करने के लिए अपडेट जारी करते हैं, तो हमलावर उसमें किए गए बदलावों को देखकर समझ सकते हैं कि सॉफ्टवेयर में कमजोरी कहां थी।

इसके बाद वे उन सिस्टम को निशाना बना सकते हैं, जिन्हें अभी तक अपडेट नहीं किया गया है। छाबड़ा ने कहा कि अब सुरक्षा अपडेट जारी होने और उस खामी का फायदा उठाने वाला हमला तैयार होने के बीच का समय हफ्तों के बजाय कुछ घंटों का रह गया है। इससे कंपनियों को अपने सिस्टम सुरक्षित करने के लिए बहुत कम समय मिलता है।

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क्या AI खुद सुरक्षा खामियां पैदा कर रहा है?

जरूरी नहीं कि AI ही सॉफ्टवेयर में सुरक्षा खामियां पैदा कर रहा हो। छाबड़ा के अनुसार, इन मामलों में इस्तेमाल की गई कमजोरियां पहले से मौजूद थीं। AI ने उन्हें पैदा नहीं किया, बल्कि उनका फायदा उठाने की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाया इसलिए कंपनियों को पुराने सॉफ्टवेयर और अधूरे अपडेट पर ध्यान देना चाहिए। इन कमजोरियों के कारण साइबर अपराधियों को हमला करने का मौका मिल सकता है।

PHP के साथ दूसरे सॉफ्टवेयर को अपडेट करना भी जरूरी

PHP का इस्तेमाल वेबसाइटों के लिए सर्वर पर सामग्री तैयार करने में होता है। अगर इसके किसी प्रभावित वर्जन में खामी मौजूद है और उसे अपडेट नहीं किया जाता, तो हैकर्स उसका फायदा उठा सकते हैं। यह समस्या केवल PHP तक सीमित नहीं है। मोहित आनंद ने GitLab और Node.js जैसे दूसरे सॉफ्टवेयर के लिए जारी सुरक्षा अपडेट का भी जिक्र किया। इससे साफ है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर समय पर अपडेट करना जरूरी है।

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कंपनियां कैसे सुरक्षित रखें अपना सिस्टम?

विशेषज्ञों के मुताबिक, कंपनियों को सबसे पहले अपने सॉफ्टवेयर की सूची तैयार करनी चाहिए। उन्हें यह पता होना चाहिए कि कौन-सा सॉफ्टवेयर और उसका कौन-सा वर्जन इस्तेमाल हो रहा है और किन सिस्टम में अपडेट बाकी हैं। इसके बाद सबसे कमजोर और जोखिम वाले सिस्टम को प्राथमिकता देकर अपडेट करना चाहिए। नियमित जांच और समय पर सुरक्षा पैच लगाने से हमलों का खतरा कम किया जा सकता है। AI के दौर में केवल नई तकनीक पर निर्भर रहना काफी नहीं है। सॉफ्टवेयर अपडेट करना और सुरक्षा खामियों को जल्द ठीक करना भी उतना ही जरूरी है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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