डिफेंस डील पर घिरे सैम ऑल्टमैन, OpenAI समझौते की भाषा में करेंगे बड़ा बदलाव

डिफेंस डील पर घिरे सैम ऑल्टमैन, OpenAI समझौते की भाषा में करेंगे बड़ा बदलाव

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March 3, 2026

OpenAI DoW Deal: अमेरिका में AI को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब OpenAI और अमेरिकी रक्षा विभाग के बीच हुए समझौते की घोषणा सामने आई। बढ़ती आलोचना के बाद कंपनी के सीईओ Sam Altman ने सार्वजनिक रूप से माना कि इस मामले में जल्दबाजी हुई और अब समझौते में अहम बदलाव किए गए हैं।

OpenAI और अमेरिकी रक्षा विभाग के बीच हुए समझौते पर विवाद बढ़ने के बाद सैम ऑल्टमैन ने नई शर्तें जोड़कर घरेलू निगरानी पर रोक स्पष्ट की। जानिए क्या बदलाव हुए और जनता की प्रतिक्रिया क्या रही।

क्या था पूरा विवाद?

कुछ दिन पहले OpenAI ने बताया था कि उसके एआई मॉडल DoW के क्लासिफाइड नेटवर्क में इस्तेमाल किए जाएंगे। यह खबर शुक्रवार रात जारी की गई थी। घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया आने लगी। लोगों को डर था कि कहीं इस तकनीक का उपयोग अमेरिकी नागरिकों की घरेलू निगरानी के लिए न किया जाए। आलोचकों का कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर एआई का इस्तेमाल नागरिक स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है।

सैम ऑल्टमैन ने क्या स्वीकार किया?

3 मार्च को सैम ऑल्टमैन ने कहा कि कंपनी ने इस संवेदनशील विषय पर संवाद करने में जल्दबाजी की। उन्होंने माना कि इतनी जटिल डील की घोषणा सोच-समझकर और स्पष्ट जानकारी के साथ करनी चाहिए थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कंपनी का आंतरिक अपडेट साझा किया, जिसमें नए नियम जोड़े जाने की पुष्टि की गई।

समझौते में क्या बड़े बदलाव हुए?

  • AI सिस्टम का जानबूझकर अमेरिकी नागरिकों या उनके खिलाफ घरेलू निगरानी में उपयोग नहीं किया जाएगा।
  • यह प्रतिबंध उस स्थिति पर भी लागू होगा जब एजेंसियां बाजार से खरीदे गए व्यक्तिगत या पहचान योग्य डेटा का उपयोग करें।
  • एआई का इस्तेमाल अमेरिकी कानूनों के अनुरूप होना चाहिए, जिनमें चौथा संशोधन (Fourth Amendment), National Security Act of 1947 और Foreign Intelligence Surveillance Act of 1978 शामिल हैं।
  • व्यावसायिक रूप से खरीदे गए डेटा को लेकर विशेष स्पष्टता इसलिए दी गई, क्योंकि आलोचकों का कहना था कि सरकार डेटा ब्रोकर से निजी जानकारी खरीदकर संवैधानिक सुरक्षा को दरकिनार कर सकती है।

खुफिया एजेंसियों को लेकर नई शर्त

संशोधित समझौते में यह भी स्पष्ट किया गया है कि OpenAI की सेवाएं NSA जैसी खुफिया एजेंसियों द्वारा सीधे इस्तेमाल नहीं की जाएंगी, जब तक कि अलग से नया अनुबंध संशोधन न हो। नागरिक स्वतंत्रता के समर्थकों की यह बड़ी मांग थी। उन्हें डर था कि सैन्य उपयोग के नाम पर एआई धीरे-धीरे घरेलू खुफिया निगरानी में प्रवेश कर सकता है।

Anthropic का अलग रास्ता

इसी बीच दूसरी एआई कंपनी Anthropic भी चर्चा में रही। उसने DoW की उस शर्त को मानने से इनकार कर दिया था, जिसमें “किसी भी कानूनी उपयोग” की अनुमति दी गई थी, अगर वह उसके Constitutional AI सिद्धांतों से टकराता हो।

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इसके बाद DoW ने Anthropic को Supply Chain Risk घोषित कर दिया, जिससे उसके कुछ सरकारी कॉन्ट्रैक्ट प्रभावित हुए। सैम ऑल्टमैन ने कहा कि उन्होंने DoW से आग्रह किया है कि Anthropic को ब्लैकलिस्ट न किया जाए और सभी एआई कंपनियों को समान संशोधित शर्तें दी जाएं।

जनता की प्रतिक्रिया और बड़ा सवाल

इस विवाद का असर तुरंत दिखा। सोशल मीडिया पर “Cancel ChatGPT” और “QuitGPT” जैसे अभियान शुरू हो गए। रिपोर्ट के अनुसार ChatGPT की अनइंस्टॉल दर 295% तक बढ़ गई, जबकि Anthropic का एआई असिस्टेंट Claude डाउनलोड सूची में ऊपर पहुंच गया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह ट्रेंड लंबे समय तक रहेगा या नहीं, लेकिन इस घटना ने दिखा दिया कि भरोसा एआई बाजार में कितनी अहम भूमिका निभाता है।

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अब बड़ा सवाल यह है कि सैन्य और खुफिया क्षेत्र में एआई की सीमाएं कौन तय करेगा? सैम ऑल्टमैन का कहना है कि नियम लोकतांत्रिक सरकारों को तय करने चाहिए, लेकिन आलोचकों का मानना है कि “कानून के अनुरूप” जैसे शब्दों में व्याख्या की गुंजाइश बनी रहती है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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