Mythos AI का अलर्ट बैंकिंग! सिस्टम पर मंडरा रहा डिजिटल खतरा

Mythos AI का अलर्ट बैंकिंग! सिस्टम पर मंडरा रहा डिजिटल खतरा

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April 13, 2026

Anthropic Mythos Ai Banking : दुनियां की बैंकिंग व्यवस्था एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। जिसका असर अब साफ दिखने लगा है। आर्टिफिशलिय इंटेलिजेंस जितनी आसानी से काम कर रही है उतने ही खतरा भी बढ़ रहा है। बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका के बड़े बैंक सचेत हो गए हैं। वे ऐसे एआई तकनीक तैयार करने में जुट गए हैं जो हमलावर की तरह बैंकिंग सिस्टम की तह तक जाकर उसकी कमजोरियों को पहचान करता है। तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

अमेरिका के बड़े बैंक अब Mythos AI के जरिए अपनी सुरक्षा जांच रहे हैं। जानिए कैसे यह तकनीक साइबर हमलों का रूप बदल रही है।

Mythos क्या है और किसने किया विकसित

बता दें कि Mythos है, जो Anthropic द्वारा विकसित एक नया AI मॉडल है। यह वर्तमान टूल्स से अलग काम करता है। यह सिस्टम की कमजोरियों को तह तक जाता है। उसकी कमजोर बढ़िया से विश्लेषण करता है। Mythos को एक हमलावर की तरह सोचने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह सिस्टम को स्कैन कर सकता है। छिपी हुई कमज़ोरियों की पहचान कर सकता है। सबसे बड़ी बात कमज़ोरियों का इस्तेमाल करके फ़ायदा कैसे उठाया जा सकता है। इन दोहरी क्षमता के कारण रेगुलेटर्स का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल हो रहा है।

किन-किन बैंक ने शुरू की टेस्टिंग

JPMorgan Chase उन शुरुआती संस्थानों में से एक है जिसने इस मॉडल के साथ काम करना शुरू कर दिया है। अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थान भी आंतरिक रूप से टेस्ट कर रहे हैं। इनमें Goldman Sachs,Citigroup, बैंक ऑफ अमेरिका  और Morgan Stanley जैसे संस्थानों के शामिल है। इस पर विशेष ध्यान तब दी जाने लगी जब इसी महीने की शुरूआत में वाशिंगटन में एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई थी। इससे साफ है कि बैंकिंग सेक्टर इस उभरते हुए खतरे को हल्के में लेना नहीं चाहता है।

सरकार की चेतावनी और बैठक

वॉशिंग्टन में हुए बैठक में Scott Bessent और Jerome Powell जैसे  वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंन भविष्य में संभावित एआई आधारित साइबर खतरे से सावधान रहने को कहा। इससे पहले कि वे टूल्स व्यापक रूप से उपलब्ध हो जाएं। सोच में यह बदलाव नीति निर्माताओं के बीच बढ़ती चिंता को दर्शाता है। साइबर सुरक्षा के जोखिम हमेशा से बैंकिंग का हिस्सा रहे हैं। लेकिन AI उस पैमाने और गति को बदल रहा है जिस पर हमले हो सकते हैं।

कैसे बदल रहा साइबर अटैक

Mythos जैसा सिस्टम सिर्फ़ एक ही खामी नहीं ढूंढता, यह कई छोटी-छोटी कमज़ोरियों को आपस में जोड़कर अधिक गंभीर बना सकती है। बड़ा हमला को अंजाम दे सकता है। पहले इस तरह के घटनाओं को अंजाम देना काफी मुश्किल होता था। लेकिन अब यह पूर्व के अपेक्षा काफी आसान होती जा रही है। यह ऐतिहासिक रूप से कुशल मानव हैकर्स के लिए भी मुश्किल रहा है।

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टेस्टिंग सामने आये खतरे

Anthropic ने अपने स्वयं के आंतरिक परीक्षण के माध्यम से इनमें से कुछ जोखिमों को उजागर किया है। और किसी नुकसान पहुँचाने वाली वेबसाइट को दूसरी साइट से डेटा एक्सेस करने की अनुमति दे सकता है। Mythos वेब ब्राउजर के खामियों को पहचान सकता है। संवेदनशील डेटा तक पहुंचने का पता लगा सकता है। एक अन्य मामले में, यह मॉडल अपने आप कई कमज़ोरियों को खोजकर उन्हें आपस में जोड़ पाया।

प्रॉजेक्ट ग्लासविंग क्या है?

इन जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए, Mythos को जारी करने का काम जान-बूझकर सीमित रखा गया है। इसे  Project Glasswing नामक एक कार्यक्रम के तहत कुछ गिनेचुने संगठनों को उपलब्ध करवाया गया है। इनमें Amazon और Apple जैसी कंपनियाँ भी शामिल है। इसका मकसद यह है कि, इससे मिलती-जुलती अन्य तकनीकें आम लोगों की पहुँच में आने से पहले ही, महत्वपूर्ण प्रणालियों को सुरक्षित कर लिया जाए।

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अमेरिकी सरकार का क्या है प्रतिक्रिया

सरकारी अधिकारियों ने भी इस बात पर ज़ोर दिया है कि यह एक अत्यंत ज़रूरी मामला है। Kevin Hassett ने इसको लेकर काफी चिंता जाहिर की है। ऐसी तकनीक को आमलोगों तक पहुंचने से पहले जांच लेने की आवश्यकता है। उन्होंने इसे सुरक्षा के लिहाज से सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कही है। हम हर संभव कदम उठा रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर कोई इन संभावित जोखिमों से सुरक्षित रहे।

Rahul Ray

मैं एनेलिटिक्स इनसाइट के लिए टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिप्टोकरेंसी, साइबर सिक्योरिटी, गैजेट्स, मोबाइल ऐप्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म को कवर करता हूं। मुझे
मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। हिन्द पोस्ट हिन्दी मैगज़ीन, ईटीवी भारत और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य करते हुए प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाई है। दिल्ली और बिहार के विभिन्न जिलों में न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड स्टोरीज़, कंटेंट प्लानिंग, कॉपी एडिटिंग एवं कंटेंट एडिटिंग से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभालने का अनुभव है। मैंने भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार से डिग्री प्राप्त की है। पाठक केंद्रित कंटेंट तैयार करना मेरी कार्यशैली में शामिल रही है।

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