Elon Musk Terafab: दुनियां के सबसे टॉप अरबपतियों के श्रेणी में शुमार Elon Musk ने एक बार फिर अपने दावो से चौंका दिया है। जिसके बाद से टेक जगत में हलचल सी मच गई है। विश्लेषकों को अपनी ओर ध्यान खींच लिया। दरअसल, मस्क ने Tesla, SpaceX और xAI के संयुक्त प्रोजेक्ट Terafab को दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी चिप मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बताया है। मस्क कहना है कि इस फैक्ट्री सिर्फ नहीं है। यह तो भविष्य की टेक्नोलॉजी की जरूरतों को पूरा करने वाला विशाल ढांचा होगा।
अरबो डॉलर के Terafab प्रोजेक्ट से Elon Musk ने फिर टेक जगत को चौंकाकर रख दिया है। आइए जानते हैं दुनिया की सबसे बड़ी चिप फैसिलिटी के पीछे क्या है वास्तविक कहानी।
क्यों पड़ी अपनी फैक्ट्री की जरूरत
मस्क का कहना है कि उनकी कंपनियों की कंप्यूटिंग जरूरतें इतनी तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान सप्लाई चेन अब पर्याप्त नहीं रह गई है। उन्होंने एक लाइवस्ट्रीमिंग के दौरान Samsung, TSMC और Micron जैसे बड़े पार्टनर्स होने के बावजूद उन्हें लगता है कि भविष्य की मांग के अनुरूप उत्पादन बहुत कम है। इसी परिस्थिति को देखते हुए स्वयं विशाल चिप फैक्ट्री खड़ी करने की योजना बनाई है। हमें चिप्स चाहिए। इसलिए टेराफैब बनाएंगे।
क्या है लक्ष्य और अनुमानित आय
प्रॉजेक्ट का उद्देश्य हर साल एक टेरावॉट कंप्यूटिंग क्षमता के बराबर उत्पादन करना है। यह फैक्ट्री उन AI सिस्टम्स, Robotics प्लेटफॉर्म्स और स्पेस टेक्नोलॉजी को सपोर्ट करेगी। कंपनियां इस दिशा में तेजी से काम भी कर रही हैं। पहली नींव टेक्सास के ऑस्टिन में रखी जाएगी। शुरुआती चरण में Advanced Technology Fab के माध्यम से इसे आगे बढ़ाया जाएगा। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत कम से कम 20 अरब डॉलर बताई जा रही है। इसे दुनिया के सबसे महंगे टेक मैन्युफैक्चरिंग निवेशों कहा जा सकता है।
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दो तरह की चिप्स पर फोकस
मस्क ने बताया कि Terafab में दो अलग-अलग कैटेगरी की चिप्स तैयार होंगी। पहली श्रेणी की चिप्स धरती पर इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी के लिए होंगी। जैसे Full Self-Driving सिस्टम और Optimus रोबोट। वहीं, दूसरी श्रेणी की चिप्स ज्यादा मजबूत बनाया जाएगा। जिन्हें अंतरिक्ष मिशनों और स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए तैयार किया जाएगा।
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दावे बड़े लेकिन काम की रफ्तार धीमी
मस्क पहले ही एक ऑर्बिटल डेटा सेंटर जैसे बड़े विचार की तरफ इशारा कर चुके हैं। इसके लिए लाखों सैटेलाइट लॉन्च करने की बात भी सामने आ चुकी है। Hyperloop, सस्ती Cybertruck और पूरी तरह autonomous driving की बाते कह चुके हैं। लेकिन हकीकत कुछ और है। इनके दावे बड़े लेकिन काम की रफ्तार धीमी रहती है।
मस्क ने फिर बड़ा सपना तो दिखा दिया है लेकिन यह हकीकत कब तक बन पाती है इसके बारे में कुछ कहना मुश्किल है।
