Engineering Education India : IIT दिल्ली के पूर्व निदेशक वी. रामगोपाल राव ने IIT में 5 साल के BTech प्रोग्राम पर विचार करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि अलग-अलग तैयारी और सीखने की रफ्तार वाले छात्रों को ज्यादा समय और अकादमिक मदद मिलनी चाहिए। राव ने यह सुझाव IIT बॉम्बे के छात्र की मौत के बाद चल रही बहस के बीच दिया है। इस मामले में पढ़ाई का दबाव, परीक्षा नियम और छात्रों को मिलने वाली मदद जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। उन्होंने IIT बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में भी अपनी बात रखी और कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
IIT BTech को 5 साल करने का क्या है प्रस्ताव?
राव के मॉडल में 5 साल को पूरा प्रोग्राम माना जा सकता है, लेकिन जो छात्र जरूरी क्रेडिट जल्दी पूरा कर लें, वे 4 साल या संभव हो तो 3.5 साल में भी डिग्री पूरी कर सकेंगे। जिन छात्रों को ज्यादा समय चाहिए, वे पांचवें साल में पढ़ाई जारी रख सकेंगे। इस अतिरिक्त समय में छात्रों को रिकॉर्डेड लेक्चर, ऑनलाइन पढ़ाई की सामग्री और जरूरत के हिसाब से भाषा संबंधी मदद दी जा सकती है। राव का कहना है कि छात्र को ज्यादा समय लेने पर अलग महसूस नहीं होना चाहिए। सभी के लिए पांच साल का ढांचा रखने से यह दबाव भी कम हो सकता है कि किसी छात्र ने पढ़ाई पूरी करने में ज्यादा समय लिया है।
I am disturbed to see Prof. Suryanarayana Doola being vilified over the recent controversy at IIT Bombay. I know Surya personally. He is one of the finest faculty members I have known in the IIT system, and a gentleman of the highest integrity. Whatever concerns have been raised… pic.twitter.com/PwlAWQWvW9
— V. Ramgopal Rao, Ph.D. (@ramgopal_rao) September 23, 2026
हर छात्र एक जैसी रफ्तार से नहीं सीखता
राव ने IIT की कक्षाओं में बढ़ती विविधता का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक, एक ही कक्षा में JEE Advanced रैंक सिंगल डिजिट से लेकर पांच अंकों तक हो सकती है। भाषा और शैक्षणिक तैयारी में अंतर भी चुनौती बढ़ाता है। उन्होंने इसे IIT के मौजूदा ‘वन साइज फिट्स ऑल’ तरीके से जोड़ा। उनका तर्क है कि शिक्षक एक ही कक्षा में हर छात्र के अलग स्तर के हिसाब से पढ़ाना मुश्किल पाते हैं। बहुत तेज पढ़ाने पर कुछ छात्र पीछे छूट सकते हैं। बहुत धीमा पढ़ाने पर दूसरे छात्रों की रुचि कम हो सकती है।
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IIT में मानक कम नहीं होंगे
राव ने साफ कहा कि ज्यादा समय देने का मतलब अकादमिक स्तर कम करना नहीं है। IIT को अपने शैक्षणिक मानक बनाए रखने चाहिए। उनके अनुसार, छात्रों की तैयारी और सीखने की गति अलग हो सकती है। ऐसे में संस्थान की जिम्मेदारी है कि जरूरी स्तर तक पहुंचने के लिए उन्हें समय और सहायता मिले।
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प्रोफेसर डूला को लेकर भी बोले राव
राव ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर चल रही सार्वजनिक आलोचना पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वे डूला को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और उन्हें IIT सिस्टम के बेहतरीन शिक्षकों में से एक मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विवाद से जुड़े आरोपों और चिंताओं की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए। किसी व्यक्ति के खिलाफ सार्वजनिक अभियान चलाना समाधान नहीं है।
