डेटा साइंस में नौकरियां और सैलरी बढ़ने से कोर्स बदल रहे, जानिए कंपनियां आज डेटा साइंस छात्रों से किन स्किल्स की उम्मीद कर रही हैं।
Data Science Education : क्या डेटा साइंस की पढ़ाई अब कॉलेज की तय अकादमिक कैलेंडर से नहीं, बल्कि नौकरी बाजार से चल रही है? अभी ऐसा ही ट्रेंड दिख रहा है। यूनिवर्सिटी, बूटकैंप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तेजी से अपने डेटा साइंस कोर्स बदल रहे हैं। इसकी बड़ी वजह कंपनियों की बढ़ती मांग, नई तकनीक और बढ़ती सैलरी है। वैश्विक डेटा साइंस प्लेटफॉर्म बाजार करीब USD 109 बिलियन का था। यह आंकड़ा 2025 का है। 2026 में बाजार के USD 132.19 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। 2031 तक यह बढ़कर USD 284.37 बिलियन हो सकता है। सालाना वृद्धि करीब 16.6% रहने का अनुमान है। बाजार की यह तेजी कंपनियों की प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत भी बढ़ा रही है।
डेटा साइंस कोर्स पर नौकरियों का सीधा असर
U.S. Bureau of Labor Statistics के मुताबिक, 2024 से 2034 के बीच डेटा साइंटिस्ट की नौकरियां 33.5% बढ़ सकती हैं। इनकी संख्या 245,900 से बढ़कर करीब 328,300 होने का अनुमान है। एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, हर साल करीब 23,400 नए अवसर सामने आ सकते हैं। यह डेटा साइंस को उसके ट्रैक किए गए रोजगारों में चौथा सबसे तेजी से बढ़ने वाला पेशा बनाता है। इन आंकड़ों का असर अब शिक्षा संस्थानों पर भी दिख रहा है। स्कूल और यूनिवर्सिटी नौकरी के आंकड़ों को देखते हुए नए डिग्री ट्रैक शुरू कर रहे हैं। कई जगह प्रवेश लक्ष्य भी बढ़ रहे हैं। यानी भर्ती बाजार अब पाठ्यक्रम तय करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
सैलरी बढ़ी तो कोर्स में भी आया बदलाव
डेटा साइंस में कमाई भी छात्रों के फैसले को प्रभावित कर रही है। मार्च 2026 में डेटा साइंटिस्ट की औसत मध्य सैलरी करीब USD 130,000 रही। यह राष्ट्रीय औसत वेतन के दोगुने से भी ज्यादा है। शीर्ष स्तर के कमाने वाले पेशेवर USD 220,000 से ज्यादा सालाना कमा रहे हैं। हालांकि 2024 और 2025 में भर्ती की रफ्तार धीमी होने के साथ वेतन वृद्धि भी सुस्त रही थी। इस साल फिर मांग बढ़ी है। छात्र अब कोर्स चुनते समय वेतन और नौकरी के आंकड़े भी देखते हैं। ऐसे में संस्थान उन कौशलों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं जिनसे जल्दी रोजगार मिल सके।
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AI और क्लाउड ने बदला डेटा साइंस का पाठ्यक्रम
कंपनियां किस तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं, इसका असर भी कक्षा तक पहुंच रहा है। करीब 62% कंपनियां उन्नत विश्लेषण के लिए डेटा साइंस प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करती हैं। 57% इनका इस्तेमाल बेहतर निर्णय लेने में करती हैं। करीब 55% प्लेटफॉर्म में AI और मशीन लर्निंग टूल पहले से शामिल हैं। वहीं 48% में स्वचालित डेटा पाइपलाइन चलती हैं, इसलिए सिर्फ पारंपरिक सांख्यिकी पढ़ाना अब पर्याप्त नहीं माना जा रहा।
अभी कई कोर्स में ये बदलाव देखने को मिल रहे हैं:
- Python पर ज्यादा जोर। करीब 63% पेशेवर इसका इस्तेमाल करते हैं और 88% छात्रों को यह सिखाया जा रहा है।
- मॉडल बनाने के साथ उसके इस्तेमाल और तैनाती की पढ़ाई।
- मार्केटिंग एनालिटिक्स के वास्तविक केस स्टडी। इसका बाजार हिस्सा 2026 में 8% है।
- क्लाउड आधारित लैब। क्लाउड डिप्लॉयमेंट सेगमेंट के 2026 में 63% बाजार हिस्से पर रहने का अनुमान है।
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Skill Gap से छोटे और तेज कोर्स की मांग
कंपनियों के सामने प्रशिक्षित लोगों की कमी भी बड़ी चुनौती है। करीब 44% कंपनियां कुशल कर्मचारियों की कमी की बात करती हैं। इसी वजह से छोटे और ज्यादा केंद्रित प्रमाणपत्रों की मांग बढ़ रही है। अब पारंपरिक चार साल की डिग्री के साथ तेज मास्टर प्रोग्राम और किसी खास टूल पर आधारित सर्टिफिकेट भी सामने आ रहे हैं। IE University इसका एक उदाहरण है। संस्थान ने नियोक्ताओं की सीधी मांग के आधार पर बिजनेस एनालिटिक्स और डेटा साइंस प्रोग्राम का विस्तार किया। अब कंपनियां सिर्फ तकनीकी कौशल नहीं देखतीं। वे चाहती हैं कि उम्मीदवार मॉडल के नतीजों को कारोबारी रणनीति से जोड़ सके।
क्षेत्रीय मांग भी पाठ्यक्रम का फोकस बदल रही है। उत्तरी अमेरिका की वैश्विक डेटा साइंस प्लेटफॉर्म बाजार में करीब 41% हिस्सेदारी है। यूरोप की हिस्सेदारी करीब 33% है। वहीं एशिया-प्रशांत क्षेत्र सबसे तेज अपनाने वाला क्षेत्र है। मजबूत बायोफार्मास्यूटिकल उद्योग वाले राज्यों में नौकरियों और वेतन की मांग ज्यादा है। ऐसे क्षेत्रों के पास की यूनिवर्सिटी हेल्थ डेटा एनालिटिक्स और नियामकीय अनुपालन जैसे विषय जोड़ रही हैं। आज कंपनियां पोर्टफोलियो प्रोजेक्ट, इंटरव्यू की तैयारी और कारोबारी नतीजों की समझ भी चाहती हैं। करीब 44% संगठनात्मक फैसलों को अब मुख्य रूप से डेटा आधारित बताया जाता है। इसी वजह से कॉलेज कैपस्टोन प्रोजेक्ट और मेंटरशिप कार्यक्रम बढ़ा रहे हैं।
