Tokenized Bond क्या है? जानें Blockchain से कैसे बदलेगा बाजार

Tokenized Bond क्या है? जानें Blockchain से कैसे बदलेगा बाजार

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September 8, 2026

Blockchain Bonds India : भारत में REC Limited ने देश का पहला Tokenized Bonds इश्यू कर के इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने 500 करोड़ जुटाए और इस इश्यू को 8 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिला। इससे नए तरीके से पैसा जुटाने में निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी दिखी है। Tokenized Bonds का यह प्रयोग सफल रहता है तो भारत में ब्लॉकचेन आधारित प्रतिभूतियों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इसमें RBI की डिजिटल करेंसी के साथ टोकन आधारित संपत्तियों को जोड़कर पूंजी बाजार को तेज, सस्ता और ज्यादा पारदर्शी बनाने की कोशिश होगी।

REC Tokenized Bonds ने भारत में नया रिकॉर्ड बनाया, जानें कैसे REC ने 500 करोड़ जुटाए और इश्यू को 8 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिला।

Tokenized Bonds क्या होते हैं?

Tokenized Bonds असल में सामान्य बॉन्ड ही होते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इनके मालिकाना हक का रिकॉर्ड पारंपरिक बाजार व्यवस्था की जगह ब्लॉकचेन या Distributed Ledger पर डिजिटल टोकन के रूप में दर्ज होता है। निवेशक को बॉन्ड पर ब्याज मिलता है। कंपनी कूपन चुकाती है और तय समय पर बॉन्ड की अवधि पूरी होती है। यानी बॉन्ड की आर्थिक और कानूनी प्रकृति नहीं बदलती। पारंपरिक व्यवस्था में डीमैट, एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग सिस्टम जैसे कई स्तर शामिल होते हैं। Tokenized Bonds में साझा डिजिटल लेजर इन रिकॉर्ड को ज्यादा सीधे तरीके से संभाल सकता है।

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Blockchain से क्या बदलेगा?

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा वित्तीय बाजार की पूरी प्रक्रिया में आ सकता है। अभी किसी लेनदेन को पूरा करने से पहले कई संस्थानों को अलग-अलग रिकॉर्ड अपडेट करने पड़ते हैं। ब्लॉकचेन आधारित व्यवस्था में अधिकृत भागीदार एक साझा रिकॉर्ड देख सकते हैं। इससे निपटान लगभग तुरंत या उसी दिन हो सकता है। इसके अलावा रिकॉर्ड मिलाने और अलग-अलग सिस्टम संभालने का खर्च घट सकता है। हर लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड भी मौजूद रहता है। इससे स्वामित्व और लेनदेन की जांच आसान हो सकती है। ध्यान रहे, Tokenized Bonds कोई Cryptocurrency नहीं हैं। यह किसी नए डिजिटल सिक्के की तरह अलग संपत्ति नहीं है। यह सामान्य बॉन्ड के स्वामित्व और भुगतान को रिकॉर्ड करने की नई तकनीकी व्यवस्था है।

REC ने कैसे किया पहला इश्यू?

REC का यह इश्यू SEBI के Regulatory Sandbox के तहत हुआ। लेनदेन में निजी क्रिप्टो टोकन की जगह RBI की Wholesale Digital Currency का इस्तेमाल किया गया। REC ने 500 करोड़ के बॉन्ड जारी किए। इन पर 7.30% कूपन मिला और इनकी अवधि करीब 20 महीने रही। इश्यू में करीब ₹796 करोड़ की बोलियां आईं। वहीं, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इश्यू 8 गुना से ज्यादा ओवरसब्सक्राइब हुआ। यह प्रयोग इसलिए अहम है क्योंकि भारत सिर्फ ब्लॉकचेन पर बॉन्ड रिकॉर्ड करने की बात नहीं कर रहा। असली परीक्षा इस बात की है कि भविष्य में प्रतिभूतियों को जारी करने, कारोबार करने और उनका निपटान करने की पूरी प्रक्रिया डिजिटल ढांचे पर कितनी आसानी से लाई जा सकती है।

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Tokenized Bonds में क्या जोखिम हैं?

नई व्यवस्था के साथ कुछ चुनौतियां भी हैं। साइबर सुरक्षा, सिस्टम को जोड़ना और तकनीकी संचालन बड़े मुद्दे रहेंगे। दुनिया भर में Tokenized Securities के नियम भी अभी विकसित हो रहे हैं। रेगुलेटर को कस्टडी, इंटरऑपरेबिलिटी और कानूनी वैधता जैसे सवालों पर स्पष्ट नियम बनाने होंगे। सबसे जरूरी बात यह है कि Tokenization से बॉन्ड का मूल जोखिम खत्म नहीं होता। कंपनी के डिफॉल्ट का खतरा, ब्याज दरों का जोखिम और किसी इश्यू की मांग जैसी चीजें बनी रहती हैं। ब्लॉकचेन सिर्फ मालिकाना हक दर्ज करने और भुगतान की तकनीकी व्यवस्था बदलता है।

Disclaimer: यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है। Tokenized Bonds और निवेश से जुड़े फैसले लेने से पहले पूरी जानकारी जरूर जांचें और जरूरत पड़ने पर किसी वित्तीय सलाहकार की सलाह लें।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।