Pentagon Microsoft Deal: पेंटागन अब अपने रक्षा तंत्र को तकनीक से हाईटेक बनाने के दिशा में अपना कदम बढ़ा दिया है। इसी सिलसिले में अमेरिकी रक्षा विभाग ने Microsoft के साथ लगभग 9.7 अरब डॉलर की एक भारी-भरकम तकनीक डील की घोषणा की है। अमेरिका अपने सेना को डिजिटल ढांचे को एकजुट कर मजबूत करना चाहता है। यह डील CETA यानी व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता के नाम से किया गया है। जिसका मुख्य उद्देश्य अलग-अलग सैन्य एजेंसियों और विभागों में बिखरे हुए सॉफ्टवेयर लाइसेंस को एक ही प्लेटफॉर्म के तहत लाना है।
पेंटागन- माइक्रोसॉफ्ट डील, क्या यह केवल सॉफ्टवेयर कॉन्ट्रैक्ट है या डिजिटल युद्ध की नई तैयारी? जानिए क्यों यह समझौता के बारे में विस्तार से।
पेंटागन को क्यों करनी पड़ी इतनी बड़ी डील?
ऐसा नहीं है कि यह तकनीक डील पहलीबार हुआ है। इससे पहले भी अलग- अलग विभाग के लिए टेक कंपनियां से तकनीक सेवाएं ली गई है। लेकिन हर विभाग से अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट के कारण लागत में बढ़ोत्तरी होती चली गई। यही वजह है कि अब पेंटागन एक साथ बड़ी डील करना लागत कम करने के हिसाब से बेहतर समझा है। बता दें कि, समझौते के तहत तकनीक कंपनियां अमेरिकी सेना, इंटेलिजेंस एजेंसियां को सेवाएं देती है।
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लाइसेंस स्प्रॉल अब बड़ी समस्या
पेंटागन के अधिकारियों की माने तो लाइसेंस स्प्रॉल एक बड़ी समस्या बन गई थी। एक ही तरह के सॉफ्टवेयर के लिए अलग-अलग एजेसिंयों को कई बार भुगतान करनी पड़ रही थी। इससे पैसा तो खर्च हो ही रहा था। तकनीक मैनेजमेंट करना भी मुश्किल हो रहा था। पेंटागन ने साफ किया है कि यह 9.69 अरब डॉलर का नया खर्च नहीं है। दरअसल, कई पुराने सॉफ्टवेयर कॉन्ट्रैक्ट एक साथ रिन्यू होने वाले थे। अब छोटे-छोटे कॉन्ट्रैक्ट को खत्म कर एक बडा एंटरप्राइज एंग्रीमेंट में बदला जा रहा है। इससे प्रशासनिक खर्च में अरबों डॉलर तक की कमी आ सकती है।
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माइक्रोसॉफ्ट को मिलेगा बड़ा रणनीतिक फायदा
इस समझौते से माइक्रोसॉफ्ट को अमेरिकी रक्षा तंत्र में मजबूत और स्थायी जगह मिल गई है। हालांकि यह पहले से ही क्लाउड सेवा सहित अन्य तकनीकी सेवाएं पेटागन को महैय्या करा रही थी। यह कंपनी के लिए केवल एक बिजनेस अवसर नहीं बल्कि रणनीतिक बढ़त भी है। अमेरिका अब अपने रक्षा सिस्टम को अधिक डेटा-ड्रिवन और ऑटोमेटेड बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इससे अन्य टेक कंपनियों के लिए रास्ते खुल सकते हैं। जानकारी के मुताबिक Amazon, Google भी सरकारी क्लाउड कॉन्ट्रैक्ट्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश में लगी हुई है।
इस डील की घोषणा से अब साफ हो गया है कि अमेरिकी सेना अब हथियार के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, डेटा भी विशेष ध्यान दे रही है।
