WhatsApp consent policy: भारत में Data Privacy की जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। सुप्रीम कोर्ट में सख्त टिप्पणियों और 213 करोड़ रुपये के जुर्माने के साये के बीच WhatsApp ने बड़ा यू-टर्न लेते हुए साफ कर दिया है कि अब यूजर की अनुमति के बिना उसका डेटा मेटा की दूसरी कंपनियों से साझा नहीं किया जाएगा। 2021 की विवादित प्राइवेसी पॉलिसी से शुरू हुआ यह मामला अब करोड़ों भारतीय यूजर्स के अधिकारों से जुड़ा सवाल बन चुका है। अदालत में दिए गए ताजा आश्वासन के बाद यह साफ दिखता हुआ नजर आ रहा है कि भारत में डेटा पर अंतिम फैसला अब कंपनियां नहीं, बल्कि यूजर्स की सहमति तय करेगी।
2021 की प्राइवेसी पॉलिसी विवाद पर WhatsApp का सुप्रीम कोर्ट नया रुख, 16 मार्च तक NCLAT निर्देशों के पालन का वादा।
क्या है मामला?
दरअसल, यह मामला 2021 की WhatsApp Privacy पॉलिसी से जुड़ा है, जब डेटा शेयरिंग नियमों में बदलाव हुआ था। इसी पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, CCI ने जांच के बाद मेटा पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। मामला NCLAT होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
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सहमति आधारित नया ढांचा
सुनवाई के दौरान कंपनी ने कहा कि वह NCLAT के निर्देशों के अनुरूप नया ढांचा लागू करेगी। इसमें यूजर खुद तय करेगा कि उसका डेटा थर्ड पार्टी या मेटा की अन्य कंपनियों से साझा हो या नहीं। इस संबंध में कोर्ट में हलफनामा भी दाखिल किया गया है।
अभी भी अपील बरकरार
बता दें कि मेटा और व्हाट्सएप ने NCLAT के फैसले को चुनौती देने वाली अपनी अपील वापस नहीं ली है और मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। हालांकि, अंतरिम रोक की मांग वाली याचिका वापस लेने की बात कही गई है। कंपनी ने अदालत को आश्वस्त किया कि वह 16 मार्च तक NCLAT के निर्देशों का पालन करेगी। साथ ही अनुपालन रिपोर्ट CCI के समक्ष भी जमा की जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
3 फरवरी की सुनवाई में Supreme Court ने कहा कि नागरिकों की निजता से समझौता नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने स्पष्ट किया कि तकनीक या बिजनेस मॉडल के नाम पर यूजर्स के डेटा का मनमाना इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है।
कंपनी के आश्वासन के बाद माना जा रहा है कि भारत में WhatsApp यूजर्स को अपने डेटा पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। यदि नया ढांचा प्रभावी रहा, तो यह डिजिटल प्राइवेसी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम साबित
