India Crypto Scam: भारत में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े हाई वैल्यू फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर बढ़ गई है। SC ने 640 करोड़ के साइबर फ्रॉड मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट भास्कर यादव को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। यह कदम इस बात को दिखाता है कि सरकार डिजिटल फंड की अनियमितताओं पर कड़ी निगरानी रख रही है।
भारत में क्रिप्टो फ्रॉड पर कड़ी कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट ने 640 करोड़ के साइबर फ्रॉड मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट भास्कर यादव को अग्रिम जमानत नहीं दी, ED कर रही है जांच।
SC ने दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश बरकरार रखा
SC की खंडपीठ ने 2 फरवरी के दिल्ली HC के आदेश को सही ठहराया, जिसमें भास्कर यादव और सह आरोपी अशोक कुमार शर्मा की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज की गई थीं। कोर्ट ने कहा कि मामला केवल क्रिप्टो ट्रेडिंग का नहीं है। अभियुक्त पेशेवर होने के नाते अपराध की आय को कई स्तरों पर लॉन्ड्रिंग करने में शामिल थे। इसे उजागर करने के लिए कस्टोडियल पूछताछ जरूरी है।
कैसे हुआ फ्रॉड और क्रिप्टो का रोल
ED के अनुसार, 640 करोड़ के इस घोटाले में फिशिंग, फेक जॉब्स, बेटिंग और जुआ जैसी योजनाएं शामिल थीं। ठगे गए पैसे 5,000 से अधिक भारतीय बैंक खातों के माध्यम से UAE के डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म PYYPL में भेजे गए।
कुछ पैसे दुबई से कैश में निकाले गए, जिनमें भारतीय बैंक के डेबिट और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल हुआ। क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल ट्रैक छुपाने और पैसे को विभिन्न खातों और देशों में भेजने के लिए किया गया। ED ने बताया कि इस ऑपरेशन में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कंपनी सेक्रेटरीज और क्रिप्टो ट्रेडर्स का नेटवर्क शामिल था।
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पंजाब-हरियाणा डिजिटल अरेस्ट केस
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 2.65 करोड़ के ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में भी अग्रिम जमानत अस्वीकार कर दी। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपियों ने तकनीक का इस्तेमाल कर पीड़ित का पैसा हड़पने में सक्रिय भाग लिया। FIR में बताया गया कि पीड़ित को नकली SC आदेश दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। कुछ पैसे क्रिप्टो में बदलकर 18 अलग-अलग फर्मों के खातों में भेजे गए।
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अहमदाबाद पुलिस की कार्रवाई
अहमदाबाद पुलिस ने हाल ही में 100 करोड़ के क्रिप्टो फ्रॉड में मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह मामला दिल्ली स्कैम की तरह फंड लेयरिंग और डिजिटल लॉन्ड्रिंग से जुड़ा था।
