Supreme Court AI Warning: भारत के SC ने मंगलवार को कोर्ट में AI टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है। सुनवाई में जजों ने बताया कि कई याचिकाओं में ऐसे फर्जी केस लॉ और गलत कोटेशन पाए गए हैं, जो रियल में मौजूद नहीं थे। इससे कोर्ट में AI के उपयोग को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।
SC ने AI के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई और फर्जी केस लॉ और गलत उद्धरण पर सवाल उठाए। कोर्ट ने वकीलों को हर याचिका का सत्यापन करने का निर्देश दिया।
CJI सुर्या कांत और बेंच की टिप्पणियां
इस मामले में मुख्य न्यायाधीश सुर्या कांत की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई की है। इनमें जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस बीवी नागरथना शामिल थे। उन्होंने पाया कि कुछ याचिकाओं में जिन निर्णयों का हवाला दिया गया था, वह या तो गलत थे या मौजूद ही नहीं थे।
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CJI कांत ने कहा कि हमें यह जानकारी मिली है कि कुछ वकील याचिकाओं के ड्राफ्ट बनाने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। जस्टिस नागरथना ने उदाहरण देते हुए कहा Mercy बनाम Mankind नाम का मामला प्रस्तुत किया गया, जो वास्तव में मौजूद नहीं है।
CJI कांत ने यह भी बताया कि इसी तरह की समस्या जस्टिस दीपंकर दत्ता के सामने भी आई थी। बेंच ने यह नोट किया कि कई बार वास्तविक SC के मामलों को उद्धृत किया गया, लेकिन कोटेशन गलत थे।
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वेरिफिकेशन और जिम्मेदारी जरूरी
जजों ने कहा कि AI तकनीक मदद कर सकती है, जैसे केस मटीरियल मैनेज करना और रिसर्च करना, लेकिन सटीकता की जिम्मेदारी उस व्यक्ति पर है जो याचिका पर हस्ताक्षर करता है। कोर्ट ने बार-बार कहा कि हर केस लॉ और उद्धरण को अधिकृत कानूनी डेटाबेस से वेरिफाइड करना जरूरी है।
SC ने साफ कहा कि अनियंत्रित AI जनरेट कंटेट कोर्ट में भरोसा कमजोर कर सकती है इसलिए वकीलों को AI का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन इसके सही और सत्यापन योग्य उपयोग के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं।
