Cryptocurrency Market: ग्लोबल क्रिप्टोकरेंसी बाजार में वीकेंड के दौरान भारी गिरावट देखी गई। कुल मार्केट वैल्यू में करीब 300 अरब डॉलर की कमी आ गई। इतनी बड़ी गिरावट के बाद कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या क्रिप्टो बाजार की बुनियाद कमजोर हो रही है, लेकिन मैक्रो इन्वेस्टर राउल पाल इस सोच से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि यह गिरावट क्रिप्टो की आंतरिक समस्या नहीं, बल्कि अमेरिकी डॉलर लिक्विडिटी की कमी का असर है।
क्रिप्टो बाजार में वीकेंड पर 300 अरब डॉलर की गिरावट आई, लेकिन विशेषज्ञ राउल पाल का कहना है कि यह लिक्विडिटी की कमी का असर है, क्रिप्टो की कमजोरी नहीं।
क्या सच में क्रिप्टो टूट रहा है?
Global Macro Investor के फाउंडर और CEO राउल पाल ने X पर पोस्ट कर कहा कि Bitcoin और क्रिप्टो खत्म हो गए जैसी बातें गलत हैं। उनके मुताबिक, यह गिरावट सिर्फ क्रिप्टो सेक्टर की नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक माहौल का हिस्सा है।
— Raoul Pal (@RaoulGMI) February 1, 2026
बिटकॉइन और टेक स्टॉक्स में समान गिरावट
पाल ने एक खास बात पर ध्यान दिलाया कि बिटकॉइन और SaaS कंपनियों के शेयर एक जैसे पैटर्न में गिर रहे हैं। दोनों अलग सेक्टर हैं, लेकिन इनकी कीमत भविष्य की ग्रोथ उम्मीदों पर टिकी होती है इसलिए इन्हें लॉन्ग-ड्यूरेशन एसेट कहा जाता है।
हाल ही में बिटकॉइन की कीमत गिरकर 75,000 डॉलर के आसपास पहुंच गई। इसी दौरान कई हाई-ग्रोथ टेक कंपनियों के शेयर भी तेजी से नीचे आए। पाल का मानना है कि जब अलग-अलग एसेट साथ गिरते हैं, तो वजह सेक्टर की नहीं बल्कि व्यापक आर्थिक होती है।
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असली वजह लिक्विडिटी की कमी
पाल के अनुसार, बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिका में नकदी की कमी से आया है। उन्होंने Federal Reserve की Reverse Repo Facility का जिक्र किया, जहां फाइनेंशियल संस्थान अपना अतिरिक्त पैसा रखते हैं। पहले जब अमेरिकी सरकार अपना Treasury General Account भरती थी, तब RRP से पैसा निकलकर बाजार में आ जाता था, जिससे संतुलन बना रहता था। लेकिन अब यह बफर लगभग खत्म हो चुका है।
इसका मतलब है कि अब TGA में पैसा जमा होने से सीधे बाजार से लिक्विडिटी कम हो जाती है। इसी दौरान सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने भी बाजार से नकदी खींच ली, जिससे जोखिम वाले एसेट जैसे क्रिप्टो और टेक स्टॉक्स पर ज्यादा दबाव आया।
फेडरल रिजर्व को लेकर अटकलें
कुछ निवेशकों ने इस गिरावट को केविन वॉर्श के नाम से जोड़ा है, जिन्हें फेड में अहम भूमिका मिलने की चर्चा है। माना जा रहा है कि वे सख्त नीतियां अपना सकते हैं लेकिन पाल इस बात को गलत कहानी बताते हैं। उनका मानना है कि वॉर्श दरें घटा सकते हैं और अर्थव्यवस्था को बढ़ने देंगे, खासकर AI से बढ़ती उत्पादकता के सहारे।
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आगे क्या हो सकता है?
पाल के अनुसार, यह गिरावट स्थायी नहीं है। जैसे ही अमेरिकी सरकारी शटडाउन की स्थिति सुधरेगी, लिक्विडिटी हालात बेहतर हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि बाजार में उतार-चढ़ाव अभी जारी रह सकता है।
