Google Privacy Lawsuit: अमेरिका में Google को डेटा प्राइवेसी से जुड़े एक बड़े केस में अहम राहत मिली है। एक फेडरल जज ने उपभोक्ताओं की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने Google से 2.36 अरब डॉलर की अतिरिक्त रकम वसूलने की अपील की थी। यह मामला उन यूजर्स के डेटा कलेक्शन से जुड़ा था, जिन्होंने एक खास प्राइवेसी सेटिंग बंद कर रखी थी, फिर भी उनका डेटा कथित तौर पर इकट्ठा किया गया।
अमेरिका में Google को बड़ी कानूनी राहत मिली है। फेडरल जज ने डेटा प्राइवेसी केस में उपभोक्ताओं की 2.36 अरब डॉलर की अतिरिक्त जुर्माने की मांग खारिज कर दी, हालांकि पहले जूरी 425 मिलियन डॉलर का हर्जाना तय कर चुकी है।
क्या था पूरा मामला?
क्लास एक्शन केस में शामिल उपभोक्ताओं का आरोप था कि Google ने उनकी जानकारी बिना सही अनुमति के ट्रैक की और इससे बड़ा मुनाफा कमाया। उन्होंने अदालत से कहा कि यह ‘गलत तरीके से कमाई गई कमाई’ है इसलिए कंपनी को 2.36 अरब डॉलर लौटाने चाहिए। उन्होंने इसे Google के मुनाफे का एक ‘संयमित अनुमान’ बताया। उपभोक्ताओं ने यह भी दावा किया कि पहले अदालतों में मामला उठने के बाद भी Google ने अपनी प्राइवेसी जानकारी देने के तरीके और डेटा कलेक्शन की प्रक्रिया में जरूरी बदलाव नहीं किए।
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Google ने क्या कहा?
Google ने अदालत में दलील दी कि अगर यूजर्स के अकाउंट से जुड़े डेटा का कलेक्शन रोका गया, तो इसका असर पूरी डिजिटल इकोनॉमी पर पड़ेगा। कंपनी के मुताबिक, लाखों ऐप डेवलपर्स Google की एनालिटिक्स सेवाओं पर निर्भर करते हैं। अगर यह डेटा बंद हुआ, तो ये सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। Google ने कहा कि ऐसा कदम इन सेवाओं को लगभग बेकार कर सकता है।
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जज का क्या फैसला रहा?
चीफ यूएस डिस्ट्रिक्ट जज रिचर्ड सीबोर्ग ने उपभोक्ताओं की मांग खारिज करते हुए कहा कि वे यह साबित नहीं कर पाए कि गूगल की मौजूदा डेटा कलेक्शन से उन्हें भविष्य में ‘अपूरणीय नुकसान’ होगा। इसी वजह से जज ने Google पर स्थायी रोक लगाने से इनकार कर दिया। जज ने यह भी कहा कि उपभोक्ता यह साबित नहीं कर सके कि वे गूगल के मुनाफे की वापसी पाने के कानूनी हकदार हैं। उनके द्वारा पेश किया गया मुनाफे का आंकड़ा ‘पर्याप्त सबूतों से समर्थित नहीं’ था।
