WhatsApp के बाद सरकार आपका नंबर दूसरी जगहों पर भी करेगी ब्लॉक!

7 mins read
295 views
December 24, 2025

WhatsApp ban India: भारत में बढ़ते साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए WhatsApp लगातार सख्त कदम उठा रहा है। Meta की इस मैसेजिंग ऐप ने बताया है कि वह हर महीने करीब 1 करोड़ भारतीय अकाउंट्स को बैन कर रहा है। ये अकाउंट्स फर्जी कॉल, स्कैम मैसेज, फ्रॉड लिंक और धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं। WhatsApp यह जानकारी अपनी मासिक कंप्लायंस रिपोर्ट में देता है, जिसे जारी करना कानूनन जरूरी है। इन रिपोर्ट्स से यह पता चलता है कि प्लेटफॉर्म पर गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कितनी कार्रवाई की जा रही है।

WhatsApp हर महीने करीब 1 करोड़ भारतीय अकाउंट्स को साइबर फ्रॉड के चलते बैन कर रहा है। अब सरकार चाहती है कि ये नंबर सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी ब्लॉक हों।

सरकार चाहती है सभी ऐप्स पर लगे रोक

हालांकि, भारत सरकार का मानना है कि सिर्फ WhatsApp पर बैन लगाना काफी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार WhatsApp से बातचीत कर रही है, ताकि जिन मोबाइल नंबरों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, उनकी जानकारी दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ भी साझा की जा सके। सरकार का कहना है कि अगर ये नंबर सभी मैसेजिंग ऐप्स और डिजिटल सेवाओं पर ब्लॉक हो जाएं, तो ठग एक ऐप छोड़कर दूसरे ऐप पर जाकर लोगों को ठग नहीं पाएंगे।

Telegram पर शिफ्ट हो जाते हैं ठग

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि WhatsApp पर बैन होने के बाद कई ठग Telegram जैसे दूसरे ऐप्स पर चले जाते हैं और वहीं से अपनी ठगी जारी रखते हैं। WhatsApp यह तो बताता है कि कितने अकाउंट्स बैन किए गए, लेकिन यह साफ नहीं करता है कि उसने अपने स्तर पर किन वजहों से अकाउंट हटाए। सरकार को सिर्फ उन्हीं अकाउंट्स की पूरी जानकारी मिलती है, जिन पर उसके निर्देश पर कार्रवाई हुई होती है।

READ MORE: X ने भारत सरकार पर किया केस, जानें क्यों

OTP से चलने वाले ऐप्स बन रहे हैं बड़ी चुनौती

WhatsApp और Telegram जैसे ऐप्स ठगों के लिए इसलिए आसान हैं क्योंकि एक बार फोन नंबर से अकाउंट बन जाने के बाद SIM कार्ड की जरूरत नहीं रहती। इससे अपराधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। अधिकारियों का कहना है कि यह जानना जरूरी है कि SIM कार्ड कब जारी हुआ और उससे जुड़ी जानकारी सही है या नहीं, तभी साइबर फ्रॉड पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकती है।

पारदर्शिता के लिए बनी थी रिपोर्टिंग व्यवस्था

इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय के पूर्व अधिकारी राकेश महेश्वरी ने बताया कि मासिक रिपोर्ट जारी करने का मकसद प्लेटफॉर्म्स की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी मामले में गहराई से जांच की जरूरत हो, तो सरकार के पास प्लेटफॉर्म से अतिरिक्त जानकारी मांगने का अधिकार मौजूद है।

READ MORE: भारत सरकार ने Reuters को ब्लॉक करने के आरोपों पर दी सफाई

साझा प्रयास से ही रुकेगी ऑनलाइन ठगी

सरकार और टेक कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल और डेटा शेयरिंग से ही साइबर फ्रॉड पर असरदार रोक लगाई जा सकती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि WhatsApp और सरकार की यह पहल ऑनलाइन ठगी के खिलाफ कितनी सफल होती है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

Previous Story

क्या अब instagram देगा यूट्यूब को मात? प्लान जान चौंक जाएंगे आप

Delhi HC ने Google, Meta और X को चेताया, गावस्कर का फर्जी कंटेंट हटाने के निर्देश
Next Story

Delhi HC ने Google, Meta और X को चेताया, गावस्कर का फर्जी कंटेंट हटाने के निर्देश

Latest from News

Don't Miss