अगर आपके पास अतिरिक्त पैसा है, तो उसे रखने के लिए FD और लिक्विड म्यूचुअल फंड दोनों विकल्प हो सकते हैं, लेकिन दोनों में रिटर्न, जोखिम और पैसे निकालने की सुविधा अलग होती है।
FD उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है, जो पहले से तय ब्याज चाहते हैं। बैंक में पैसा एक तय अवधि के लिए जमा होता है और उस पर निश्चित दर से ब्याज मिलता है। बाजार की हलचल का सीधा असर मूल रकम पर नहीं पड़ता।
लिक्विड फंड आमतौर पर कम अवधि वाले डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। इनका इस्तेमाल ऐसी रकम रखने के लिए किया जाता है, जिसकी जल्द जरूरत पड़ सकती है।
अगर आपको पता है कि पैसा एक निश्चित समय तक नहीं चाहिए और आप तय रिटर्न चाहते हैं, तो FD पर विचार कर सकते हैं। वहीं, अगर पैसा कुछ समय के लिए रखना है और जरूरत पड़ने पर निकालना है, तो लिक्विड फंड ज्यादा लचीला विकल्प हो सकता है।
FD का ब्याज आम तौर पर आपकी लागू आयकर दर के हिसाब से टैक्स के दायरे में आता है। बैंक कुछ मामलों में TDS भी काट सकता है। लिक्विड फंड के रिटर्न पर भी लागू टैक्स नियमों के अनुसार टैक्स लगता है। FD में रिटर्न तय होता है, जबकि लिक्विड फंड में रिटर्न की गारंटी नहीं होती।
अगर आपकी प्राथमिकता तय और गारंटीड रिटर्न है, तो FD पर विचार किया जा सकता है। अगर आपको फ्लेक्सिबिलिटी और आसान निकासी चाहिए, तो लिक्विड फंड उपयोगी हो सकता है। सही विकल्प आपकी जरूरत, निवेश अवधि, जोखिम क्षमता और टैक्स स्थिति पर निर्भर करता है।