टैक्स बदलाव से iPhone मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा फायदा

सरकार ने बजट 2026 में ऐसा टैक्स नियम पेश किया है, जो भारत में iPhone मैन्युफैक्चरिंग को तेज कर सकता है। अब विदेशी कंपनियां अपने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को मशीनें बिना अतिरिक्त टैक्स के उपलब्ध करा सकती हैं।

पहले Apple और उसके पार्टनर्स जैसे Foxconn और Tata को मशीनों पर भारी निवेश करना पड़ता था। नए नियम से मालिकाना हक होने पर टैक्स का डर खत्म हो गया है, जिससे उत्पादन सेटअप आसान और तेज होगा।

यह टैक्स छूट केवल उन फैक्ट्रियों पर लागू होगी जो कस्टम्स बॉन्डेड एरिया में हैं। ऐसे क्षेत्र एक्सपोर्ट केंद्रित मैन्युफैक्चरिंग के लिए उपयुक्त हैं और भारत से ग्लोबल सप्लाई बढ़ाने में मदद करेंगे।

सरकार का उद्देश्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा एक्सपोर्ट हब बनाना है। स्मार्टफोन और हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स में निवेश को बढ़ावा देने के लिए यह बदलाव 2030-31 तक लागू रहेगा।

Apple चीन से अपनी सप्लाई चेन को फैलाने पर काम कर रहा है और भारत इसमें अहम भूमिका निभा रहा है। रिसर्च फर्म काउंटरप्वाइंट के मुताबिक, भारत की iPhone मार्केट हिस्सेदारी 2022 के बाद दोगुनी होकर 8% हो गई है।

नए टैक्स नियम से भारत का रोल ग्लोबल iPhone मैन्युफैक्चरिंग मैप पर और मजबूत होगा। इससे उत्पादन लागत कम हो सकती है और भारत को हाई-एंड स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग के लिए आकर्षक विकल्प बनाया जा रहा है।