कम P/E देखकर स्टॉक सस्ता लग सकता है, लेकिन हर लो P/E शेयर अंडरवैल्यूड नहीं होता। कंपनी के बिजनेस में गहरी समस्या होने पर स्टॉक लंबे समय तक सस्ता रह सकता है। इसे वैल्यू ट्रैप कहते हैं।
अगर किसी कंपनी के प्रोडक्ट की मांग लगातार घट रही है या बिजनेस मॉडल पुराना हो रहा है, तो कम P/E आकर्षक नहीं रहता। अर्निंग्स घटने का खतरा होने पर शेयर लंबे समय तक कमजोर रह सकता है।
किसी अनुकूल इंडस्ट्री साइकिल में कंपनी की कमाई अचानक बढ़ सकती है और P/E सिर्फ 4x दिख सकता है, लेकिन सामान्य हालात लौटने पर प्रॉफिट 60-70% गिर जाए, तो स्टॉक उतना सस्ता नहीं रहता।
कम P/B देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। अगर नेट डेट, EBITDA के मुकाबले 5-6 गुना है, तो कंपनी की संपत्ति का बड़ा हिस्सा कर्ज से जुड़ा हो सकता है और शेयरहोल्डर वैल्यू घट सकती है।
बड़ा एसेट बेस हमेशा अच्छी कंपनी की पहचान नहीं है। अगर ROCE सिर्फ 5% है और कॉस्ट ऑफ कैपिटल 12%, तो कंपनी पूंजी पर पर्याप्त रिटर्न नहीं कमा रही। ऐसे में वैल्यू बनना मुश्किल है।
निवेश से पहले P/E और P/B के साथ डेट, अर्निंग्स, गवर्नेंस, टेक्नोलॉजी और प्रतिस्पर्धा देखें। असली मौका तभी है, जब कंपनी की वास्तविक वैल्यू ज्यादा हो और उसे अनलॉक करने की क्षमता भी मौजूद हो।