ChatGPT, Google Gemini और Grok जैसे AI चैटबॉट्स अब घर और ऑफिस दोनों जगह खूब इस्तेमाल हो रहे हैं। लोग तेजी से हर सवाल का जवाब AI से पूछने लगे हैं।
नई स्टडी में दावा किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति रोज सिर्फ 10-15 मिनट तक भी AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल करता है, तो उसकी सोचने और समस्या सुलझाने की क्षमता कमजोर हो सकती है।
रिसर्चर्स के मुताबिक AI की थोड़ी मदद भी इंसान को खुद सोचने से रोक सकती है। लोग धीरे-धीरे हर मुश्किल सवाल का जवाब सीधे AI से मांगने लगे हैं, जिससे दिमाग कम मेहनत करता है।
स्टडी में यह भी सामने आया कि AI पर ज्यादा निर्भर लोग मुश्किल सवालों पर जल्दी हार मान लेते हैं। अगर AI सपोर्ट हट जाए तो उनकी परफॉर्मेंस कमजोर हो जाती है।
रिसर्च में पाया गया कि जो लोग AI से सीधे जवाब मांगते हैं, उन पर इसका नेगेटिव असर ज्यादा पड़ता है। वहीं हिंट या एक्सप्लेनेशन लेने वालों की सोचने की क्षमता बेहतर बनी रहती है।
रिसर्चर्स का कहना है कि AI को कोच या मददगार की तरह इस्तेमाल करना ठीक है, लेकिन हर छोटी चीज के लिए पूरी तरह AI पर निर्भर हो जाना भविष्य में दिमाग के लिए नुकसानदायक हो सकता है।