NCLAT ने साफ कर दिया है कि WhatsApp यूजर्स की प्राइवेसी और सहमति से जुड़े नियम सिर्फ विज्ञापन तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि विज्ञापन और गैर-विज्ञापन दोनों उद्देश्यों पर समान रूप से लागू होंगे।
NCLAT ने कहा कि WhatsApp और Meta यूजर्स के डेटा पर एकतरफा अधिकार का दावा नहीं कर सकते। यूजर्स का डेटा बिना उनकी मर्जी के किसी भी मकसद से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
NCLAT ने दोहराया कि यूजर्स को यह अधिकार होना चाहिए कि उनका कौन सा डेटा, किस उद्देश्य से और कितने समय के लिए लिया जा रहा है।
NCLAT के मुताबिक, अगर WhatsApp यूजर्स को फीचर्स इस्तेमाल करते समय Opt-in या Opt-out का विकल्प देता है, तो यूजर्स के अधिकार सुरक्षित रहते हैं और डेटा के दुरुपयोग की आशंका खत्म होती है।
NCLAT ने CCI की याचिका स्वीकार करते हुए WhatsApp को तीन महीने के भीतर जरूरी बदलाव लागू करने का निर्देश दिया है। यह आदेश WhatsApp यूजर डेटा के सभी गैर-WhatsApp उद्देश्यों पर लागू होगा।
हालांकि, NCLAT ने Meta के साथ डेटा शेयरिंग पर 5 साल का बैन हटाया, लेकिन 213 करोड़ रुपये का जुर्माना बरकरार रखा। WhatsApp की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी को प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन के रूप में सही ठहराया गया।